ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज पर जीएसटी का चाबुक, 'गलत क्लासिफिकेशन' के चलते लगा 6.37 करोड़ का जुर्माना
सीजीएसटी विभाग ने जारी किया नोटिस; कंपनी ने कहा- फैसले को कानूनी चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं
नई दिल्ली। एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) एक बड़े कर विवाद में फंस गई है। केंद्रीय माल एवं सेवा कर (CGST) और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त, ठाणे कार्यालय ने कंपनी पर जीएसटी चोरी का आरोप लगाते हुए 6.37 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना और कर मांग नोटिस जारी किया है। यह मामला वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच का है।
क्या है पूरा मामला? ब्रिटानिया ने मंगलवार को शेयर बाजार (Stock Exchange) को दी गई जानकारी में बताया कि यह कार्रवाई जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत की गई है। विभाग का मुख्य आरोप यह है कि कंपनी ने आपूर्ति किए गए सामानों का 'गलत क्लासिफिकेशन' (Wrong Classification) किया है, जिसके कारण कर का सही भुगतान नहीं हुआ।
ये भी पढ़ें खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में पुलिस-प्रसाशन अलर्ट पर, श्रीनगर में मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं बंदजुर्माने का विवरण विभाग ने कंपनी से कुल 6.37 करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
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जीएसटी कर: 2.12 करोड़ रुपये
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जुर्माना: 4.24 करोड़ रुपये
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इसके अतिरिक्त: लागू ब्याज का भुगतान भी कंपनी को करना होगा।
कंपनी का रुख ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि इस नोटिस का कंपनी के परिचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे इस आदेश की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं और इसके खिलाफ कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए इसे अदालत या उच्च अपीलीय मंच पर चुनौती देंगे।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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