एसीबी ने दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर नरेश सिंह को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली की एसीबी (एंटी करप्शन ब्रांच)) ने जल बिल स्कैम मामले में एक अन्य आरोपित नरेश सिंह को गिरफ्तार किया। नरेश सिंह घोटाले के समय दिल्ली जल बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात थे। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि नरेश सिंह पर कई लाख रुपये घूस लेने का […]
नई दिल्ली। दिल्ली की एसीबी (एंटी करप्शन ब्रांच)) ने जल बिल स्कैम मामले में एक अन्य आरोपित नरेश सिंह को गिरफ्तार किया। नरेश सिंह घोटाले के समय दिल्ली जल बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात थे।
एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि नरेश सिंह पर कई लाख रुपये घूस लेने का आरोप है।इसके एवज में उन्होंने अन्य कंपनियों को बिल वसूली कर दिल्ली जल बोर्ड में जमा न करने की सहूलियत दी थी। इस मामले में एसीबी ने पेमेंट कंपनियों के अधिकारियों व मालिकों को पहले ही गिरफ्तार किया है।
ये भी पढ़ें अधिवक्ता सम्मान बचाओं संघर्ष समिति ने 19 मार्च को जनरल बॉडी की बुलाई बैठक, धरना- प्रर्दशन रहा जारीगिरफ्तार नरेश सिंह वर्ष 2015 से 2020 तक दिल्ली जल बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात थे। इस दौरान उन्होंने फ्रेश पे कंपनी को लगातार सहूलियतें दी, ताकि वह लोगों से बिल वसूली कर सके।
विजिलेंस जांच में दिल्ली जल बोर्ड में 20 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी। इस जांच में दिल्ली जल बोर्ड के फंड में 20 करोड़ रुपये की घपलेबाजी का खुलासा हुआ है।
जांच में यह भी पता चला है कि कॉरपोरेशन बैंक की मिली-भगत से कुछ लोगों ने भ्रष्टाचार के इस खेल को अंजाम दिया है। पहले से गिरफ्तार आरोपितों में राजू नायर, गोपी कुमार केडिया और डॉक्टर अभिलाष पिल्लई शामिल हैं। राजू नायर ऑरम-ई- पेमेंट प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक है। डॉक्टर अभिलाष पिल्लई फ्रेशपे आईटी सॉल्यूशन का निदेशक है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां