राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए..भव्य 'श्रीराम यंत्र' स्थापना अनुष्ठान में शामिल होकर देश की सुख-समृद्धि की कामना की

अयोध्या। वासंतिक नवरात्र और हिंदी नववर्ष के प्रथम दिन अयोध्या धाम में आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संगम देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर पहुंचकर ‘श्रीराम यंत्र’ स्थापना के विशेष अनुष्ठान में भाग लिया। इस अवसर पर पूरी रामनगरी भक्ति, सुरक्षा और परंपरा के रंग में रंगी नजर आई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सेना के विशेष विमान से अयोध्या पहुंचीं। यहां से वह कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सड़क मार्ग से राम मंदिर पहुंचीं। रामनगरी में उनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी उपमुख्यमंत्री केशव और ब्रजेश पाठक मौजूद रहें। राष्ट्रपति ने ‘जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार’ से अयोध्या में प्रवेश किया और मंदिर परिसर का अवलोकन किया।
इसके बाद उन्होंने परिसर स्थित दुर्गा माता मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए। ट्रस्ट के मुताबिक सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी वीआईपी, सुगम और विशिष्ट दर्शन पास पूरी तरह निरस्त कर दिए गए। 19 मार्च के लिए ऑनलाइन जारी किए गए सभी पास भी रद्द माने गए, जिससे श्रद्धालु केवल सामान्य व्यवस्था के तहत ही दर्शन कर सके। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू मंदिर के द्वितीय तल स्थित गर्भगृह में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के अनुष्ठान में शामिल हुईं।
ये भी पढ़ें पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल रिहैब सेंटर पर एयरस्ट्राइक की, 400 से ज्यादा मौतें : तालिबान
उन्होंने कहा कि यह यंत्र भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति, मर्यादा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है, जिससे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और सुदृढ़ होगी। माना जाता है कि ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना से मंदिर की पवित्रता और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे अयोध्या धाम से धर्म, शांति और मर्यादा का संदेश और अधिक व्यापक रूप से प्रसारित होगा। इस विशेष अवसर पर केरल की आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी भी अपने करीब एक हजार भक्तों के साथ अयोध्या पहुंचीं। कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग 2000 लोग और 1984 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां