एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत: सांपों के जहर और रेव पार्टी केस में FIR रद्द, अदालत ने कानूनी आधार पर दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव को उच्चतम न्यायालय से एक बड़ी कानूनी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश के खिलाफ वीडियो शूट में सांपों के जहर के इस्तेमाल और रेव पार्टियों में ड्रग्स के सेवन के आरोपों में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्राथमिकी (FIR) कानून की दृष्टि से मान्य नहीं है, जिसके चलते इसे जारी रखना न्यायोचित नहीं होगा।
बरामद पदार्थ एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर
अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने दलील दी कि मामले में सह-आरोपी से बरामद किया गया पदार्थ (सांप के जहर का एंटीडोट) एनडीपीएस एक्ट की वैधानिक अनुसूची के अंतर्गत नहीं आता है। पीठ ने इस तथ्य को रिकॉर्ड में लिया कि एल्विश यादव के पास से व्यक्तिगत रूप से कोई बरामदगी नहीं हुई थी। चार्जशीट में केवल यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से ऑर्डर दिए थे। कोर्ट ने पाया कि पेश किए गए तथ्यों के आधार पर एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लागू करना कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण था।
शिकायतकर्ता की वैधता पर उठे सवाल
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 से जुड़े आरोपों पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 55 के तहत मुकदमा केवल उसी अधिकारी की शिकायत पर शुरू किया जा सकता है, जिसे इसके लिए विधिवत अधिकार प्राप्त हो। इस मामले में शिकायत 'पीपल फॉर एनिमल्स' (PFA) संगठन से जुड़े गौरव गुप्ता नामक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी, जिसे कानूनन सक्षम प्राधिकारी नहीं माना गया। अदालत ने न केवल शिकायत की तकनीकी वैधता पर सवाल उठाए, बल्कि शिकायतकर्ता की सद्भावना (Good faith) पर भी संदेह व्यक्त किया।
मेरिट नहीं, तकनीकी खामियों पर रद्द हुई कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि एफआईआर अपने वर्तमान स्वरूप में विचारणीय नहीं थी। अदालत ने दलील स्वीकार की कि भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए आरोप स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं होते थे क्योंकि वे एक पुरानी शिकायत का हिस्सा थे जिसे पहले ही बंद किया जा चुका था। हालांकि, बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने आरोपों की मेरिट यानी गहराई से जांच नहीं की है, बल्कि केवल सीमित कानूनी और तकनीकी मुद्दों के आधार पर इस कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद एल्विश यादव के समर्थकों में खुशी की लहर है, जबकि कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा सबक है।
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