लैंड फॉर जॉब स्कैम: लालू-राबड़ी की याचिका खारिज, कोर्ट से नहीं मिली राहत..जानें क्या थी दस्तावेजों की मांग

नई दिल्ली। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े मामले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उन 1600 दस्तावेजों को उपलब्ध कराने की मांग की थी जिन पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भरोसा नहीं किया था। स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेज की मांग करना उल्टी गंगा बहाने जैसा होगा और इससे ट्रायल बाधित होगा।
कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी के अलावा आरके महाजन और महीप कपूर की भी ऐसी ही याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया। आरके महाजन ने एक दस्तावेज, जबकि महीप कपूर ने 23 दस्तावेज की मांग की थी। कोर्ट ने 16 फरवरी को लालू यादव के खिलाफ औपचारिक रुप से आरोप तय कर दिया था। लालू यादव और राबड़ी देवी ने आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल का सामना करने की बात की। कोर्ट ने कहा था कि लालू यादव ने इस मामले में सिंडिकेट बनाकर काम किया। इस मामले की आरोपित राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी। प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई, 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। लैंड फॉर जॉब मामले में 7 अक्टूबर, 2022 को सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी, 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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