देश के गरीब परिवारों तक एलपीजी गैस की पहुंच तय करें सरकार:संसदीय समिति
संसद में पेश संसदीय समिति की रिपोर्ट में 90 दिनों के तेल भंडार रखने सिफारिश

नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संबन्धी संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में अनुदान की मांगों (2026-27)' पर अपनी सातवीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें समिति ने उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 'टारगेटेड सब्सिडी' पर जोर दिया है। वहीं वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट को देखते हुए 90 दिनों के कच्चे तेल का भंडारण बनाए रखने की सिफारिश की है।
लोक सभा में समिति के सदस्य जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और राज्य सभा में मयंककुमार नायक ने इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा। रिपोर्ट में देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और गरीब परिवारों तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई क्रांतिकारी सिफारिशें की गई हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10.43 करोड़ उपभोक्ताओं के डेटा का विश्लेषण करते हुए समिति ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में गैस रिफिल (दोबारा भरवाने) की दर सबसे कम है, वहां औसत से अधिक सब्सिडी देने की व्यवहार्यता जांची जाए। समिति ने ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में एलपीजी की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 'रिफिल व्यवहार' के बारीक डेटा का उपयोग कर विशेष उपाय तैयार करने की सलाह दी है। वहीं समिति द्वारा मंत्रालय को पीएनजी का विस्तार के लिए वर्ष 2034 तक 12 करोड़ पीएनजी कनेक्शन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिटी गैस वितरण नेटवर्क को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा में वैश्विक मानक को हासिल करे सरकार
समिति ने वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट को देखते हुए भारत की भंडारण क्षमता पर चिंता व्यक्त की है। रणनीतिक भंडार की दिशा में समिति ने मंत्रालय को देश के भीतर 90 दिनों के कच्चे तेल का भंडारण बनाए रखने के वैश्विक मानक को हासिल करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करने का निर्देश दिया है। समिति ने अनुकूल भूवैज्ञानिक स्थितियों वाले क्षेत्रों में और नये इंफ्रास्ट्रक्चर के रुप में अधिक भूमिगत भंडारण कक्ष बनाने की संभावना तलाशने को भी कहा गया है। समिति ने अपनी इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और आधुनिक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर वाला राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
उज्ज्वला योजना: अधिक सब्सिडी का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10.43 करोड़ उपभोक्ताओं के डेटा का विश्लेषण करते हुए समिति ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में गैस रिफिल (दोबारा भरवाने) की दर सबसे कम है, वहां औसत से अधिक सब्सिडी देने की व्यवहार्यता जांची जाए। समिति ने ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में एलपीजी की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 'रिफिल व्यवहार' के बारीक डेटा का उपयोग कर विशेष उपाय तैयार करने की सलाह दी है। वहीं समिति द्वारा मंत्रालय को पीएनजी का विस्तार के लिए वर्ष 2034 तक 12 करोड़ पीएनजी कनेक्शन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सिटी गैस वितरण नेटवर्क को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
बजट और बुनियादी ढांचे पर सिफारिशें
समिति ने मंत्रालय को अपने वित्तीय प्रबंधन और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर अधिक सटीक होने का निर्देश दिया है कि विवेकानुसार बजट के रूप में बजट अनुमान और संशोधित अनुमान के बीच के अंतर को कम करने के लिए आधुनिक पूर्वानुमान मॉडलों को अपनाने की बात कही गई है। वहीं पूंजीगत व्यय कम तहत बुनियादी ढांचे के विकास को मध्यम और दीर्घकालिक आर्थिक विकास का मुख्य वाहक बनाने हेतु सरकारी बजटीय समर्थन बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
भविष्य की तकनीक जेआई-वीएएन योजना
समिति ने जेआई-वीएएन योजना के तहत उन्नत बायोफ्यूल और 2जी इथेनॉल तकनीक की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इंद्रधनुष गैस ग्रिड की दिशा में पूर्वोत्तर के लिए 'हाइड्रोकार्बन विजन 2030' को साकार करने हेतु राज्य सरकारों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
समिति की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और आधुनिक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर वाला राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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