अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान को बड़ी राहत: हरियाणा सरकार ने मुकदमा चलाने से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की कार्यवाही

नयी दिल्ली/चंडीगढ़। 'ऑपरेशन सिंदूर' पर फेसबुक पोस्ट के कारण कानूनी विवादों में घिरे अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के लिए सोमवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। हरियाणा सरकार ने प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को समाप्त करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: "विद्वान प्रोफेसर भविष्य में बरतेंगे विवेक"
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा:
"हमें इस बात पर शक करने का कोई कारण नहीं है कि याचिकाकर्ता, जो एक अत्यंत विद्वान प्रोफेसर हैं, भविष्य में भी अपनी अभिव्यक्ति में समझदारी और विवेकपूर्ण तरीके से ही काम करेंगे।"
हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने 3 मार्च को ही अभियोजन की मंजूरी न देने का निर्णय ले लिया था।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला पिछले साल मई में प्रोफेसर महमूदाबाद के एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ था:
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पोस्ट की सामग्री: उन्होंने पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद की आलोचना करते हुए युद्ध से बचने की सलाह दी थी। साथ ही, 'ऑपरेशन सिंदूर' की प्रेस वार्ता करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र करते हुए लिखा था कि जिस ऊर्जा से उनकी तारीफ हो रही है, वैसी ही ऊर्जा अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर भी दिखाई जानी चाहिए।
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पुलिसिया कार्रवाई: इस पोस्ट के बाद हरियाणा पुलिस ने उनके खिलाफ 'दुश्मनी को बढ़ावा देने' और 'सार्वजनिक उपद्रव' की धाराओं में दो FIR दर्ज की थीं। प्रोफेसर को 3 दिन हिरासत में भी रहना पड़ा था।
मामला प्रभावी रूप से समाप्त
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी और मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। अब चूंकि राज्य सरकार ने कानूनी कार्यवाही आगे न बढ़ाने का फैसला किया है, इसलिए यह मामला तकनीकी और कानूनी रूप से पूरी तरह बंद हो गया है।
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