आईआईटी बॉम्बे हॉस्टल में एक छात्र के पास से पांच जिंदा कारतूस बरामद, पुलिस ने दर्ज किया मामला
मुंबई। मुंबई के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (आईआईटी पवई) के हॉस्टल परिसर में एक छात्र के बैग में पांच जिंदा 7.65 एमएम कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार आईआईटी के हॉस्टल परिसर में एक छात्र के पास कारतूस होने की सूचना मुखबिर की मदद से सुरक्षाकर्मियों को मिली। सूचना मिलने पर जब सिक्योरिटी जांच की तो इस दौरान एक छात्र के बैग से पांच जिंदा 7.65 एमएम कारतूस बरामद किए गए। मामले में पवई पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने सर्वोत्तम आनंद सतीशचंद्र चौधरी (23) के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ये भी पढ़ें 'यादव जी की लव स्टोरी' पर बोले अखिलेश यादव: "भाजपा नफरत की पटकथा लिखती है, हम दिलों को जोड़ने की"पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हॉस्टल नंबर-1 के ग्राउंड फ्लोर पर दो छात्रों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर झगड़ा हुआ था। सिक्योरिटी टीम ने मौके पर पहुंचकर रूम नंबर 93 में रहने वाले सूरज दुबे और रूम नंबर 89 में रहने वाले अमन को शांत कराया। बातचीत के दौरान दुबे और उसके दोस्त अपूर्व मिश्रा के पास से शराब की गंध आने पर नियमों के तहत कमरों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान सूरज दुबे के कमरे में रखे काले बैग से “केएफ 7.65” मार्क वाले पांच जिंदा कारतूस बरामद हुए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 3,500 रुपए बताई जा रही है। पूछताछ में दुबे ने बैग को अपूर्व मिश्रा का बताया।
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आगे की जांच में अपूर्व ने दावा किया कि कारतूस उसके दोस्त सर्वोत्तम चौधरी के हैं, जो बिहार के समस्तीपुर का निवासी है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में सर्वोत्तम ने कथित तौर पर बिहार के मुंगेर से कारतूस खरीदने की बात स्वीकार की। इसके बाद पवई पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गोला-बारूद रखने और परिवहन करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस अब संभावित अवैध सप्लाई नेटवर्क और घटना के मकसद की गहन जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सर्वोत्तम के निशानदेही पर कारतूस बेचने वाले की तलाश की जा रही है। इसके लिए टीम का भी गठन किया जा रहा है। साथ ही सर्वोत्तम ने अभी तक किस-किस को ये कारतूस दी है, उसकी भी जांच की जा रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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