सोने की आसमान छूती कीमतों के चलते उपभोक्ता का रुझान कम कैरेट के आभूषण की ओर बढ़ा
भीलवाड़ा । राजस्थान में सोने और चांदी की कीमतों में आ रही रिकॉर्ड तोड़ तेजी ने भीलवाड़ा के सर्राफा बाजार की तस्वीर बदल दी है। आसमान छूते भावों के कारण अब आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों ने भी अपनी रणनीति बदल ली है। शहर के बाजारों में अब पहले जैसी रौनक कम ही नजर आ रही है, जिसके चलते कारोबारी अब कम कैरेट के किफायती आभूषणों पर फोकस कर रहे हैं। सर्राफा व्यापारियों का मानना है कि सोने की कीमतों ने आम आदमी की पहुंच से दूरी बना ली है। पहले जहां शादियों और अन्य आयोजनों के लिए 22 कैरेट (91.6 प्रतिशत शुद्धता) के गहनों की भारी मांग रहती थी, वहीं अब ऊंचे दामों के कारण ग्राहक सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं। इसी का नतीजा है कि बाजार में कम शुद्धता वाले, लेकिन बेहद आकर्षक और आधुनिक डिजाइन के गहनों का स्टॉक बढ़ाया जा रहा है।
स्वर्णाभूषण व्यवसायी एबी ज्वेलर्स के मनीष बहेड़िया ने रविवार को बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में 14 और 18 कैरेट के आभूषणों की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। 14 कैरेट सोने में शुद्धता लगभग 54.5 प्रतिशत होती है, जिससे गहनों की लागत काफी कम हो जाती है। भारी-भरकम गहनों के बजाय हल्के वजन और कम कैरेट के डिजाइन्स को शादियों के लिए भी पसंद कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार द्वारा नौ कैरेट सोने को मान्यता देने से बाजार को एक नया सहारा मिला है। बहेड़िया के अनुसार, यह उन ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो कम बजट में सोने की चमक पहनना चाहते हैं। फिलहाल भीलवाड़ा का सर्राफा बाजार पूरी तरह से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां ऊंची कीमतों ने ग्राहकों की जेब पर असर डाला है, वहीं कम कैरेट की ज्वेलरी ने बाजार की गिरती बिक्री को थामने का काम किया है। व्यापारियों को उम्मीद है कि इन नए विकल्पों के साथ बाजार में फिर से स्थिरता आएगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
