“पहचान पत्र से तय होगा इंसान?” हरिद्वार की घटना पर उठे सवाल
हरिद्वार। देवभूमि हरिद्वार, जिसे दुनिया भर में मोक्ष और आस्था की नगरी के रूप में जाना जाता है, वहां से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सामाजिक सद्भाव और मानवीय अधिकारों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से यहां अपनी मेहनत और पसीने से जीवन बसर करने वाले मजदूरों को अब अपनी पहचान की परीक्षा देनी पड़ रही है। ताजा मामला शान मोहम्मद नाम के एक बुजुर्ग मजदूर से जुड़ा है, जो पिछले लगभग चार दशकों से हरिद्वार की गलियों और घाटों के आस-पास मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शान मोहम्मद को कुछ स्थानीय लोगों और अराजक तत्वों ने काम के दौरान बीच रास्ते में रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि समूह ने उनसे उनका आधार कार्ड दिखाने की मांग की और उनके धर्म को लेकर पूछताछ शुरू कर दी। कथित तौर पर उन्हें वहां से चले जाने की चेतावनी दी गई और भविष्य में वहां काम न करने की हिदायत दी गई। इस घटना के दौरान कथित रूप से की गई तीखी धार्मिक टिप्पणियों ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो प्रसारित होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। पीड़ित मजदूर का कहना है कि उसने अपनी पूरी जिंदगी इसी शहर की सेवा में लगा दी, लेकिन आज तक उसे इस तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा था। इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या किसी पवित्र शहर में आजीविका कमाने के लिए किसी विशेष धर्म या पहचान का होना अनिवार्य होता जा रहा है। स्थानीय पुलिस प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में जुट गया है, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
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