किसी को ना समझें अपने से छोटा
विद्या, धन, बल, पदवी प्राप्त होने पर अभिमान न करो। कम विद्या वाले को, निर्धन या जिनके पास धन आप जितना नहीं, पर्याप्त बल के स्वामी होने पर अपने से निर्बल को, पद में अपने से निम्र स्तर वाले को हेय तथा छोटा न समझो। उन्हें असम्मान नहीं सम्मान दें। सदैव नम्रता और शिष्टता का […]
विद्या, धन, बल, पदवी प्राप्त होने पर अभिमान न करो। कम विद्या वाले को, निर्धन या जिनके पास धन आप जितना नहीं, पर्याप्त बल के स्वामी होने पर अपने से निर्बल को, पद में अपने से निम्र स्तर वाले को हेय तथा छोटा न समझो। उन्हें असम्मान नहीं सम्मान दें। सदैव नम्रता और शिष्टता का व्यवहार करो। उसे अपने व्यवहार से यह सोचने का अवसर न दो कि मुझे छोटा समझा जा रहा है।
यर्जुवेद का ऋषि कहता है ‘उत्तान हस्तानम सोच सद्य’ – यदि संसार में उन्नति करना चाहते हो, मान-सम्मान चाहते हो तो विनम्र बनो।
फ्रांस के राजा हेनरी चतुर्थ अपने अधिकारियों के साथ कहीं जा रहे थे। मार्ग में एक भिक्षुक ने अपनी टोपी उतारकर झुककर उनका अभिवादन किया। सम्राट ने भी उसी प्रकार उत्तर दिया। यह देखकर एक अधिकारी ने पूछा, “महामहिम क्या एक भिखारी को इस प्रकार से अभिवादन करना उचित है?” सम्राट ने कहा, “सभ्यता मिथ्या अभिमान में नहीं नम्रता में है। मुझे एक भिक्षु जितना नम्र तो होना ही चाहिए।”
हमें ऐसी घटना से शिक्षा लेनी चाहिए। हम किसी को छोटा न समझें। जब दूसरे मिले तो ससम्मान अभिवादन तो करना ही चाहिए।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां