प्रशंसा नहीं, आलोचना से सीखें जीवन जीने की कला और अपनाएं नम्रता

संसार का यह सामान्य स्वभाव है कि यहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी प्रशंसा सुनना पसंद करता है। आलोचना किसी को भी प्रिय नहीं लगती, किन्तु सत्य यह है कि जो व्यक्ति अपनी प्रशंसा सुनकर हर्षित होता है, उसे अपनी आलोचना सुनने और स्वीकार करने का अभ्यास भी होना चाहिए। वास्तव में, जीवन जीने की कला वही जानता है जो स्वयं को हर परिस्थिति के अनुरूप ढालने की सामर्थ्य रखता है।
बुद्धिमान और मूर्ख के बीच का अंतर
एक बुद्धिमान व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह घोर निराशाजनक परिस्थितियों में भी आशा का दामन नहीं छोड़ता। जहाँ एक मूर्ख व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं हो पाता, वहीं बुद्धिमान व्यक्ति के लिए 'संतुष्टि' ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी होती है। जो प्राप्त है, उसमें प्रसन्न रहना ही बुद्धिमत्ता है।
क्रोध नहीं, नम्रता है सुरक्षा कवच
जीवन के संघर्षों में क्रोध को कभी अपना हथियार मत बनाइये। यदि आप नम्रता का कवच पहनेंगे, तो सदैव सुरक्षित रहेंगे। यह सदैव स्मरण रहे कि ईश्वर की असीम कृपा केवल उसी हृदय पर होती है, जो सेवाभाव और करुणा से परिपूर्ण हो। परोपकार और दया ही वह मार्ग हैं जो हमें परमात्मा के निकट ले जाते हैं।
राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता
जिस समाज या राष्ट्र में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को अपने पड़ोसी से श्रेष्ठ समझने लगे, वहाँ एकता की कल्पना करना व्यर्थ है। अहंकार विभाजन पैदा करता है, जबकि समानता प्रेम। हमें यह ज्ञान तो है कि इस ब्रह्मांड के समस्त प्राणी एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं, फिर क्या हमें ईश्वर की किसी भी संतान से घृणा करने का अधिकार है? निश्चय ही नहीं।
संकल्पों पर पूर्ण विराम की आवश्यकता
हमें भाषा में अल्पविराम और पूर्णविराम लगाना तो आता है, परन्तु जीवन की सार्थकता तब है जब हम अपने व्यर्थ के संकल्पों और नकारात्मक विचारों पर भी पूर्णविराम लगाना सीखें। मन की शांति व्यर्थ की चिंताओं को रोकने में ही निहित है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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