अखिलेश यादव का 40 हजार का दांव, पंकज चौधरी का तंज: "सपा वाले चांद-तारे तोड़कर लाने का वादा भी कर सकते हैं"

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा महिलाओं के लिए की गई एक बड़ी चुनावी घोषणा ने उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अखिलेश यादव ने वादा किया है कि यदि सपा की सरकार बनती है, तो प्रदेश की गरीब महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान: 'स्त्री सम्मान' कार्ड
एक हालिया कार्यक्रम (एजेंडा आजतक 2025/26) और जनसभाओं के दौरान अखिलेश यादव ने 'आधी आबादी' को साधने के लिए अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है।
सालाना 40,000 रुपये
ये भी पढ़ें बुलंदशहर : जेवर के पास पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़, पैर में गोली लगने से नैनू मावी घायलअखिलेश ने कहा कि बिहार में जिस तरह 10,000 रुपये की बात हुई, हम यूपी में गरीब माताओं-बहनों को सालाना 40,000 रुपये (करीब ₹3,333 प्रति माह) सीधे बैंक खाते में देंगे।
बीजेपी पर तंज
उन्होंने कहा कि भाजपा ने महिलाओं का जो पैसा (महंगाई और अन्य कारणों से) छीना है, हम वह सम्मान राशि के रूप में वापस लौटाएंगे। उन्होंने अपनी पिछली सरकार की 'समाजवादी पेंशन योजना' का जिक्र करते हुए कहा कि हम जो कहते हैं, वो करते हैं।
पंकज चौधरी का पलटवार: "ये केवल मुंगेरीलाल के सपने हैं"
भाजपा के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव के इस वादे को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता को गुमराह करने वाला बताया।
चांद-तारे का तंज
पंकज चौधरी ने कहा, "सपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। वे सत्ता पाने के लिए जनता से चांद-तारे तोड़कर लाने का वादा भी कर सकते हैं, लेकिन जनता को पता है कि ये वादे कभी जमीन पर नहीं उतरेंगे।" उन्होंने सवाल उठाया कि सपा यह बताए कि इतना भारी-भरकम फंड कहाँ से आएगा? क्या वे प्रदेश को कर्ज में डुबोना चाहते हैं? भाजपा नेताओं ने कहा कि महिलाएं केवल पैसा नहीं, बल्कि 'सुरक्षा' चाहती हैं, जो केवल योगी सरकार में मुमकिन है। सपा के शासन में 'गुंडाराज' के कारण महिलाएं घर से निकलने में डरती थीं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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