रिहाई के बाद लेह पहुँचे सोनम वांगचुक: केंद्र से 'लद्दाख मुद्दे' पर तुरंत बातचीत की मांग

लेह। लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक हिरासत से रिहा होने के बाद अपने क्षेत्र में लौट आए हैं। रिहाई के बाद उन्होंने लद्दाख से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद के लिए तैयार रहने की बात कही और सकारात्मक माहौल की उम्मीद जताई। वांगचुक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। लगभग 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों पर लौटकर लोगों से मिलना बेहद सुखद है। हमें उम्मीद है कि जिस उद्देश्य के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा।”
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष उम्मीद और जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशभर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरान मिले समर्थन ने उन्हें और मजबूत बनाया है। वांगचुक ने यह भी कहा कि वह लोगों से मिलकर आगे की रणनीति पर चर्चा करने को उत्सुक हैं।
केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उनकी हिरासत रद्द किए जाने के बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। वह 26 सितंबर 2025 से हिरासत में थे। विशेषज्ञों का मानना है कि वांगचुक की रिहाई और उनका यह सकारात्मक रुख लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों,जैसे पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय अधिकार और प्रशासनिक मांगों पर संवाद की संभावनाओं को नई दिशा दे सकता है।
रिहाई के बाद उनका यह संदेश न केवल उनके समर्थकों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि आने वाले समय में लद्दाख से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता मजबूत हो सकता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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