जौनपुर जेल में पूर्व सांसद उमाकांत यादव की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद BHU रेफर

जौनपुर। यूपी के जौनपुर के जिला कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद उमाकांत यादव की शुक्रवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए बीएचयू रेफर कर दिया।जिला अस्पताल के डॉक्टर रूपेश कुमार के अनुसार, उमाकांत यादव को सीने में तेज दर्द की शिकायत थी। जांच में उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि वे पहले से ही इन बीमारियों की दवाएं ले रहे थे। ईसीजी कराने के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें वाराणसी स्थित बीएचयू भेजा गया। विदित हो कि उमाकांत यादव वर्ष 1995 में हुए एक चर्चित हत्याकांड में सजा काट रहे हैं।
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ये भी पढ़ें कार चार्जिंग से उठी चिंगारी इंदौर में घर बना मौत का फंदा एक ही परिवार के 7 लोग जिंदा जल गए4 फरवरी 1995 को जौनपुर के शाहगंज रेलवे स्टेशन पर मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। सूचना पर पहुंचे जीआरपी जवानों से कहासुनी के बाद तत्कालीन विधायक के करीबी राजकुमार द्वारा सिपाही को थप्पड़ मारने से मामला और भड़क गया। पुलिस ने राजकुमार को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उमाकांत यादव अपने समर्थकों के साथ जीआरपी चौकी पहुंच गए।आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर अंधाधुंध फायरिंग कराई, जिसमें जीआरपी कांस्टेबल अजय सिंह की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
मामले में हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ और जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई।लंबी सुनवाई के बाद 8 अगस्त 2022 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शरद कुमार त्रिपाठी ने उमाकांत यादव सहित छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।पूर्व सांसद उमाकांत यादव का राजनीतिक जीवन लंबा है लेकिन विवादों से घिरा रहा है। उनके खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 37 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल उनकी हालत को देखते हुए उन्हें बीएचयू में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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