भाजपा नेता अपर्णा यादव का बयान—"हिंदू लड़की को जबरन हिजाब क्यों?"

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू अपर्णा यादव ने एक बार फिर अपने बेबाक बयान से सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने धर्मांतरण और धार्मिक प्रतीकों को जबरन थोपने की कोशिशों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सीधा सवाल किया कि आखिर किसी हिंदू लड़की को जबरन हिजाब पहनने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है?
"आस्था व्यक्तिगत, दबाव अस्वीकार्य"
अपर्णा यादव ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर नागरिक को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा:
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सांस्कृतिक अस्मिता: "हमारी संस्कृति और सनातन धर्म हमें गर्व से अपनी पहचान बनाए रखने की सीख देता है। किसी गैर-मजहब के प्रतीकों को किसी पर थोपना उसकी मौलिक स्वतंत्रता का हनन है।"
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जबरन हिजाब पर आपत्ति: उन्होंने हाल ही में सामने आए कुछ कथित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि स्कूलों या अन्य संस्थानों में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए प्रेरित करना या मजबूर करना बेहद चिंताजनक है।
लव जिहाद और धर्मांतरण पर सख्त रुख
अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के धर्मांतरण विरोधी कानून का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग पहचान छिपाकर या दबाव बनाकर बेटियों का धर्म परिवर्तन कराते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को जागरूक करें और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भरें।
विपक्ष पर साधा निशाना
बयान के दौरान उन्होंने विपक्षी दलों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि "तुष्टिकरण की राजनीति" करने वाले लोग तब चुप हो जाते हैं जब बहुसंख्यक समाज की बेटियों के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' नीति की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब ऐसी अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है।
राजनीतिक मायने: अपर्णा यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड और धार्मिक पहचान को लेकर बहस छिड़ी हुई है। उनके इस आक्रामक रुख को भाजपा के प्रखर हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूती देने के रूप में देखा जा रहा है।
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