भगवान के दरबार में भी VIP सिस्टम? – गरीब भक्त लाइन में, अमीर सीधे दर्शन!

देवघर। आस्था के केंद्रों पर बढ़ते 'वीआईपी कल्चर' और 'सुगम दर्शन' के नाम पर वसूली जा रही भारी-भरकम फीस ने एक बार फिर देशव्यापी बहस छेड़ दी है। झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम से आई हालिया तस्वीरों ने भगवान के दरबार में अमीर और गरीब के बीच खिंचती गहरी खाई को उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब महादेव के दर्शन के लिए भी जेब का भारी होना अनिवार्य शर्त बन गया है?
कतार में गरीब, 'शॉर्टकट' में अमीर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ईश्वर के द्वार पर राजा और रंक सब बराबर होते हैं, लेकिन धरातल की हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। एक तरफ आम श्रद्धालु घंटों, और श्रावणी मेले जैसे अवसरों पर तो दिनों-दिन लंबी कतारों में भूखे-प्यासे लगकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। वहीं दूसरी ओर, 'सुगम दर्शन' के कूपन लेकर आने वाले 'प्रीमियम' श्रद्धालु चंद मिनटों में गर्भ गृह तक पहुंचकर दर्शन कर बाहर निकल आते हैं। व्यवस्था सुधार के नाम पर लागू किया गया यह सिस्टम अब आम भक्तों के लिए 'धक्का-मुक्की और तिरस्कार' का सबब बनता जा रहा है।
क्या 'प्रीमियम सर्विस' बन गई है आस्था?
ये भी पढ़ें नोरा फतेही के नए गाने पर मेरठ में भारी आक्रोश, एसएसपी ऑफिस पर गूंजे ‘बॉलीवुड मुर्दाबाद’ के नारेबाबा बैद्यनाथ धाम ही नहीं, बल्कि तिरुपति बालाजी से लेकर काशी विश्वनाथ और महाकाल मंदिर तक, लगभग हर बड़े ज्योतिर्लिंग और सिद्धपीठ में 'पेड दर्शन' की व्यवस्था फल-फूल रही है। इसे प्रशासन अक्सर भीड़ नियंत्रण और मंदिर के रखरखाव के लिए फंड जुटाने का जरिया बताता है, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि यह व्यवस्था सीधे तौर पर संविधान और अध्यात्म की मूल भावना का उल्लंघन है। जब मंदिर के भीतर ही वीआईपी और वीवीआईपी की श्रेणियां बन जाती हैं, तो साधारण भक्त खुद को भगवान के दरबार में भी उपेक्षित महसूस करने लगता है।
व्यवस्था या विभेद: अब सोचने का समय
सवाल यह नहीं है कि मंदिरों का प्रबंधन कैसे हो, सवाल यह है कि क्या प्रबंधन के नाम पर भक्तों के साथ होने वाला 'बदतर व्यवहार' जायज है? सुरक्षा और सुविधा के नाम पर तैनात निजी सुरक्षाकर्मी अक्सर आम कतार में लगे भक्तों के साथ अभद्र व्यवहार करते देखे जाते हैं, जबकि पैसे देकर आए लोगों के लिए रेड कारपेट बिछाया जाता है। क्या आस्था को इस तरह बाजारवाद की भेंट चढ़ाना सही है? बाबा धाम से उठी यह आवाज अब देश के हर उस श्रद्धालु की आवाज बन गई है जो घंटों लाइन में खड़े होकर यह देखता है कि कोई 'बड़ा आदमी' उसके हक के दर्शन छीनकर आगे निकल गया।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

टिप्पणियां