आज स्वामी विवेकानन्द की जन्म जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। उनके अमूल्य विचार और शिक्षाएं आज भी युवाओं और आम लोगों के लिए मार्गदर्शक साबित हो रही हैं।
स्वामी विवेकानन्द का संदेश था—“उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” उनका यह भी मानना था कि जीवन उन्हीं का धन्य है, जो दूसरों के लिए जीते हैं। उन्होंने कहा कि हम वही हैं जो हमारी सोच ने हमें बनाया है, इसलिए हमेशा अपने विचार पवित्र रखें। उनके अनुसार शब्द गौण हैं, लेकिन विचार दूर तक यात्रा करते हैं।
इक्कीसवीं सदी में भी उनके विचारों का प्रभाव युवाओं और समाज पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। करोड़ों युवा आज भी स्वामी विवेकानन्द को अपना आदर्श मानते हैं।
सन् 1893 में अमेरिका के शिकागो में उन्होंने विश्व धर्म महासभा को भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए सम्बोधित किया। अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने ‘मेरे अमेरिकी भाईयों और बहनों’ के शब्दों से की, जिसने दुनिया का दिल जीत लिया।
स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएं आज भी लोगों की सोच और व्यक्तित्व को बदलने में सहायक हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।