विनम्रता की ताकत !
एक समय महर्षि दयानन्द दानापुर में विराजमान थे। एक दिवस एक भक्त ने महर्षि से कहा “स्वामी जी आप ऋषि हैं?” स्वामी जी ने नम्रता से कहा, “ऋषियों के अभाव में आप मुझे चाहे जो कह ले। यदि मैं गौतम, कपिल कणादादि ऋषियों के समय में हुआ होता तो मेरी गणना साधारण विद्वानों में भी […]
एक समय महर्षि दयानन्द दानापुर में विराजमान थे। एक दिवस एक भक्त ने महर्षि से कहा “स्वामी जी आप ऋषि हैं?”
स्वामी जी ने नम्रता से कहा, “ऋषियों के अभाव में आप मुझे चाहे जो कह ले। यदि मैं गौतम, कपिल कणादादि ऋषियों के समय में हुआ होता तो मेरी गणना साधारण विद्वानों में भी कठिनता से होती।”
महान वैज्ञानिक न्यूटन जिन्होंने गुरूत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया था, उनकी विद्या बुद्धि पर सारे इंग्लैंड को गर्व था, किन्तु स्वयं न्यूटन को न कोई गर्व था न अहंकार। एक दिन एक महिला ने न्यूटन की योग्यता एवं बुद्धि की प्रशंसा की। न्यूटन सुनकर फूलकर कुप्पा नहीं हुए, बल्कि विनम्रता के साथ कहा कि मैं तो उस बच्चे के समान हूं, जो सत्य के विशाल समुद्र के किनारे पर बैठा हुआ केवल कंकरों को चुनता रहा हूं।
यह होती है विनम्रता। इसलिए पर्याप्त विद्या पाकर यदि आप में अहंकार आने लगे तो ऐसे महापुरूषों की विनम्रता का ध्यान रख लिया करो।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
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