संवेदनशील मुद्दों को दिखाने वाले शो 'अनुपमा' का हिस्सा होने पर गर्व है: अद्रिजा रॉय
मुंबई। टीवी शो 'अनुपमा' में राही कपाड़िया का किरदार निभा रही अद्रिजा रॉय ने शो में चल रहे मेल डोमेस्टिक वायलेंस (पुरुषों पर घरेलू हिंसा) ट्रैक पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे संवेदनशील और कम चर्चित मुद्दों को सामने लाने वाले शो का हिस्सा होने पर गर्व है।
अद्रिजा ने बताया, “टेलीविजन में मतलब की बातचीत शुरू करने की बहुत ताकत है। ‘अनुपमा’ जैसे पॉपुलर शो असली सोशल मुद्दों को दिखाकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाते हैं। घरेलू हिंसा के बारे में ज्यादातर महिलाओं की कहानियां सुनाई जाती हैं, जो एक बेहद गंभीर मुद्दा है। लेकिन सच यह भी है कि पुरुष भी शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार होते हैं। ज्यादातर समय वे चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें शर्म आती है या समाज में जज होने का डर होता है।”
ये भी पढ़ें भाग्यश्री की रियल लाइफ 'मैने प्यार किया': क्लास के सबसे बिगड़े शहजादे पर दिल हार बैठी थीं 'राजकुमारी' उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहलू को भी मान्यता देना बहुत जरूरी है। अद्रिजा को ‘अनुपमा’ के मेकर्स की सबसे अच्छी बात यही लगती है कि वे सोशल टॉपिक्स को सिर्फ ड्रामा के लिए नहीं लाते, बल्कि हर ट्रैक के जरिए एक सकारात्मक और अर्थ से भरा मैसेज देते हैं। अद्रिजा ने बताया, “मेकर्स अपनी कहानियों को बहुत सावधानी से चुनते हैं। हर ट्रैक का असल जिंदगी से कनेक्शन होता है – कुछ ऐसा जो लोग अपने घरों या रिश्तों में रोज महसूस करते हैं। ‘अनुपमा’ जैसे शो उन लोगों को हिम्मत देते हैं जो ऐसे हालात में अकेले चुपचाप परेशान होते हैं।
ये भी पढ़ें भाग्यश्री की रियल लाइफ 'मैने प्यार किया': क्लास के सबसे बिगड़े शहजादे पर दिल हार बैठी थीं 'राजकुमारीजब दर्शक स्क्रीन पर ऐसी कहानियां देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे अकेले नहीं हैं। इससे उन्हें बोलने या मदद मांगने की हिम्मत मिलती है। यही कहानी कहने की असली ताकत है।” अभिनेत्री मानती हैं कि एक्टर्स और क्रिएटर्स की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म का समझदारी से इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, “अगर हम किसी की जिंदगी में छोटा सा भी बदलाव ला सकें या उन्हें यह महसूस करा सकें कि उनकी बात सुनी जा रही है, तो हमारा काम सार्थक हो जाता है। मुझे गर्व है कि हमारा शो रोजमर्रा के उन मुद्दों को दिखाता रहता है जो होते तो बहुत हैं, लेकिन जिन पर खुलकर बात कम होती है।”
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