सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइंस को लेकर केंद्र और यूजीसी को जारी किया नोटिस
कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से पूछा है कि इन नए नियमों को सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रति "भेदभावपूर्ण" क्यों न माना जाए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित पुरानी याचिकाओं के साथ जोड़कर एक साथ सुनने का निर्देश दिया है।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। खासकर नियमों में 'जाति-आधारित भेदभाव' की परिभाषा केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों तक सीमित रखी गई है। इससे सामान्य वर्ग के लोगों को भेदभाव की शिकायत करने का कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलता, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता के अधिकार के खिलाफ है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह नियम एकतरफा है और उच्च शिक्षा में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकता है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में नए नियमों के अमल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि नियमों के प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है। अदालत ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और नियमों पर नए सिरे से विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने का सुझाव दिया था। फिलहाल, 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे, ताकि जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों पर कोई रोक न लगे।
यूजीसी ने 13 जनवरी को ये नए नियम जारी किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता आदि पर आधारित भेदभाव रोकना और समानता को बढ़ावा देना था, लेकिन सामान्य वर्ग से जुड़े कई छात्रों और संगठनों ने इसका विरोध किया और इसे 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' बताया। विरोध के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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