रोजाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ तो बदन दर्द से मिलेगी मुक्ति
नई दिल्ली। योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। आज के अनियमितता के समय में तो योगासन और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। योग एक्सपर्ट पूर्ण भुजंगासन को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा पूर्ण भुजंगासन को एक प्रभावी आसन बताता है। यह भुजंगासन का उन्नत और गहन रूप है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीलापन देने के साथ ही पीठ और पूरे शरीर को मजबूत बनाता है और छाती को खोलकर श्वसन क्षमता को बढ़ाता है।
पूर्ण भुजंगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, थायरॉइड ग्रंथि उत्तेजित होती है और तनाव में कमी आती है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या पीठ दर्द की शिकायत रहती है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, गंभीर पीठ की समस्या, उच्च रक्तचाप, हर्निया या हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो तो इस आसन से बचना चाहिए। शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग आसनों का अभ्यास धैर्य और नियमितता के साथ करें। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं, लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा रहता है।
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लेखक के बारे में
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रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
