खतरे की घंटी है बढ़ते ट्राइग्लिसराइड का स्तर, जानें क्या है बचने के लिए जरूरी कदम
नई दिल्ली। शरीर को ऊर्जा देने के लिए वसा बहुत जरूरी है। वसा ही शरीर में ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होकर काम करने की क्षमता को बढ़ाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही वसा जब रक्त में बढ़ जाती है तो ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ जाता है और यह पूरे शरीर के लिए खतरे की घंटी है। ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ना, मधुमेह, मोटापा, जोड़ों का दर्द और दिल की बीमारियों की शुरुआत है। आमतौर पर लोग ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल को एक ही मानकर चलते हैं, लेकिन ये दोनों रक्त में पाए जाने वाले दो अलग फैट्स हैं। ट्राइग्लिसराइड शरीर की कोशिकाओं में जमा होता है और शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है।
इसके लिए सबसे पहले आहार में कार्बोहाइड्रेट कम करें। अगर आप शारीरिक मेहनत कम करते हैं तो कार्बोहाइड्रेट कम खाएं। कार्बोहाइड्रेट गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, रागी और मिलेट में भी पाया जाता है। दूसरा, आहार में हेल्दी फैट्स को शामिल करें। जैसे देसी घी, मक्खन, सरसों का तेल, और एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को आहार में शामिल कर सकते हैं। इसके साथ ही कम से कम 1 घंटा शारीरिक व्यायाम भी जरूरी है। रोजाना वॉक से लेकर एक्सरसाइज जरूर करें। बार-बार खाने की आदत भी ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करें। रोजाना खुद को 14-16 घंटे भूखा रखें।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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