देश में 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए 25 लाख 'रणबांकुरे' तैनात, हर 70 वोटर पर एक अधिकारी की नजर
मुख्य चुनाव आयुक्त का सख्त निर्देश, हिंसा और प्रलोभन मुक्त हों चुनाव, 1111 केंद्रीय पर्यवेक्षक भी निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंचे

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के साथ-साथ 6 राज्यों के उपचुनावों को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कमर कस ली है। आयोग ने इस विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए 25 लाख से अधिक चुनाव अधिकारियों की भारी-भरकम फौज मैदान में उतार दी है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इन 5 राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या 17.4 करोड़ से अधिक है। प्रशासनिक सुदृढ़ता का आलम यह है कि औसतन प्रत्येक 70 मतदाताओं पर एक चुनाव अधिकारी तैनात किया गया है, ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की गुंजाइश न रहे। इन पांचों राज्य में तैनात किये गये 25 लाख से अधिक चुनाव अधिकारियों में 15 लाख मतदान कर्मी, 8.5 लाख सुरक्षा कर्मी शाकमल हैं। वहीं सूक्ष्म पर्यवेक्षकों के रुप में 49 हजार (क्षेत्र स्तर) + 15 हजार (गणना स्तर) चुनाव पर निगरानी रखेंगे। जबकि 21 हजार क्षेत्र अधिकारी और 2.18 लाख से अधिक बीएलओ तैनात किये गये हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मियों को पूर्ण निष्पक्षता और बिना किसी भय के कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
ये भी पढ़ें पूर्व सेना प्रमुख पांडे का डीपफेक वीडियो सामने आया, सरकार ने पाकिस्तान से जुड़े खातों को ठहराया दोषीकेंद्रीय पर्यवेक्षकों की सीधी निगरानी
चुनावों की शुचिता बनाए रखने के लिए 832 विधानसभा क्षेत्रों में 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। इनमें 557 सामान्य पर्यवेक्षक, 188 पुलिस पर्यवेक्षक और 366 व्यय पर्यवेक्षक शामिल हैं। ये पर्यवेक्षक सीधे जनता और राजनीतिक दलों के संपर्क में रहेंगे और प्रतिदिन एक निश्चित समय पर उनकी शिकायतों का निपटारा करेंगे।
शिकायत दर्ज करना हुआ आसान
मतदाताओं की सहायता के लिए जमीनी स्तर पर बीएलओ को फोन कॉल और ECINet ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर स्तर पर किसी भी प्रश्न या शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1950 जारी किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के तहत, चुनाव ड्यूटी में लगे सभी कर्मी आयोग की प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे और सीधे आयोग के प्रति जवाबदेह होंगे।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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