ईशान किशन की जबरदस्त वापसी, दो साल के तूफानी संघर्ष के बाद फिर चमका टीम इंडिया का स्टार विकेटकीपर
खेल की दुनिया में कभी तालियां मिलती हैं तो कभी आलोचनाएं सुननी पड़ती हैं। भारतीय क्रिकेट के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन के लिए बीते दो साल किसी रोलर कोस्टर से कम नहीं रहे। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि वह टीम इंडिया की तस्वीर से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन आज उनकी वापसी सिर्फ रन की कहानी नहीं बल्कि आत्मविश्वास और अनुशासन की मिसाल बन चुकी है।
दक्षिण अफ्रीका दौरे से शुरू हुआ कठिन दौर
साल 2024 के दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान ईशान बीच सीरीज से लौट आए थे। इसके बाद उन्हें रणजी ट्रॉफी पर आईपीएल को प्राथमिकता देने के कारण केंद्रीय अनुबंध से बाहर कर दिया गया। यह फैसला उनके करियर के लिए बड़ा झटका था।
इसी दौरान टीम में ऋषभ पंत की वापसी हो चुकी थी। ध्रुव जुरेल प्रभाव छोड़ रहे थे। संजू सैमसन और जितेश शर्मा जैसे विकल्प मौजूद थे। ऐसे में चयन क्रम में ईशान पीछे खिसक गए और टीम में उनकी जगह बनाना मुश्किल दिखने लगा।
मानसिक थकान से आत्ममंथन तक का सफर
आलोचनाओं के बीच ईशान ने क्रिकेट से छोटा ब्रेक लिया। मानसिक और भावनात्मक थकान ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था। लेकिन उन्होंने किसी भी आलोचना का सार्वजनिक जवाब नहीं दिया। उन्होंने चुपचाप खुद पर काम करना शुरू किया।
उन्होंने ध्यान करना शुरू किया। परिवार की सलाह पर श्रीमद्भगवद्गीता पढ़नी शुरू की। दिन में दो बार अकादमी में अभ्यास किया। पोषण पर ध्यान देने के लिए निजी शेफ रखा। नींद और आराम को प्राथमिकता दी। उनका पूरा रूटीन बदल गया और प्रक्रिया उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बन गई।
परिवार बना सबसे बड़ा सहारा
इस कठिन दौर में परिवार उनके लिए कवच बनकर खड़ा रहा। बड़े भाई ने तकनीकी सलाह देकर खेल में सुधार करने में मदद की। नेट्स में घंटों सिमुलेशन ट्रेनिंग से उनके शॉट चयन में स्पष्टता आई।
उन्होंने मानसिक रूप से खुद को तैयार किया कि पावरप्ले में कितने रन बनाने हैं और किस गेंदबाज पर कैसे आक्रमण करना है। यही स्पष्टता हाल के मैचों में दिखाई दी जब दबाव की स्थिति में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
बदला हुआ नजरिया और परिपक्व सोच
ईशान का स्वभाव आज भी हल्का फुल्का और टीम में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाला है। लेकिन अब उनकी मानसिक मजबूती पहले से ज्यादा परिपक्व है। बड़ी पारी खेलने के बाद भी उन्होंने जश्न से ज्यादा रिकवरी पर ध्यान दिया क्योंकि अगला मुकाबला सामने था।
उन्होंने उम्मीदों का बोझ खुद पर रखना बंद कर दिया है। अब वह निस्वार्थ होकर खेलते हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ वापसी नहीं बल्कि खुद को बेहतर इंसान और खिलाड़ी बनाना था।
वापसी जो सिर्फ आंकड़ों से बड़ी है
आज ईशान किशन की कहानी यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती। अगर व्यक्ति प्रक्रिया पर विश्वास रखे और आत्ममंथन करे तो वापसी की नई इबारत जरूर लिखी जा सकती है।
उनकी वापसी यह साबित करती है कि आलोचनाओं के शोर के बीच भी अगर मन शांत रहे और मेहनत जारी रहे तो सफलता फिर से कदम चूमती है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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