बागपतः कृष्णी नदी के पुनर्जीवन की बड़ी पहल: बागपत में 12 गांवों में चलेगा स्वच्छता व जल संरक्षण अभियान
बागपत। कृष्णी नदी को स्वच्छ, अविरल और जीवनदायिनी स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में बागपत प्रशासन ने एक व्यापक पहल की शुरुआत की है। जनपद में जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से कृष्णी नदी से जुड़े गांवों में विशेष स्वच्छता अभियान प्रारंभ किया जाएगा। यह अभियान जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में बरनावा क्षेत्र से आरंभ होकर नदी से जुड़े कुल 12 गांवों के 29 किमी क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा।
यह अभियान ग्राम बरनावा, असारा, अशरफाबाद थल, इब्राहिमपुर माजरा, मोहम्मदपुर कंडेरा, गांगनौली, दादरी, बामनौली, मौजिजाबाद नांगल, रंछाड़, रहतना और सूजती गांवों से होकर गुजरने वाली कृष्णी नदी की सफाई और पुनर्जीवन पर केंद्रित रहेगा। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि नदी की सफाई केवल सरकारी प्रयास न रहकर जन आंदोलन का रूप ले, जिसमें स्थानीय ग्रामीण, स्वयंसेवी संगठन, पंचायत प्रतिनिधि, युवाओं की टोलियां और विभिन्न विभाग मिलकर सक्रिय भूमिका निभाएं।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में तैयार की गई इस कार्ययोजना के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित श्रमदान को मुख्य आधार बनाया गया है। अभियान में राजस्व विभाग, विकास विभाग, पंचायत राज विभाग, नगर विकास विभाग, सिंचाई, सर्वे, वन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, छात्र-छात्राओं और स्थानीय नागरिकों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि नदी के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो सके।
अभियान का प्रमुख उद्देश्य केवल नदी की सतही सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कृष्णी नदी के जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) को सुदृढ़ करना, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना और जनपद के गिरते भूजल स्तर को ऊपर उठाना भी है। इसके लिए नदी किनारे जमा गाद, प्लास्टिक कचरा, जैविक एवं अजैविक अपशिष्ट को हटाने के साथ-साथ प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित करने वाले अवरोधों की पहचान कर उन्हें हटाया जाएगा।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान नदी के किनारे मौजूद अतिक्रमणों को चिन्हित किया जाए। जहां-जहां नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा बन रहे अवैध निर्माण, मिट्टी भराव या अन्य अतिक्रमण पाए जाएं, वहां विधिसम्मत कार्रवाई की तैयारी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी का पुनर्जीवन तभी संभव है जब उसके प्राकृतिक मार्ग और चौड़ाई को संरक्षित रखा जाए।
इसके साथ ही अभियान के दौरान यह भी सर्वे किया जाएगा कि नदी के किनारे कहां पारंपरिक तालाब, जलाशय और जल भराव क्षेत्र मौजूद हैं और किन स्थानों पर उन्हें पुनर्जीवित किया जा सकता है। प्रशासन की योजना है कि नदी से जुड़े इन तालाबों और जल संरचनाओं को आपस में जोड़कर इंटीग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट मॉडल विकसित किया जाए, जिससे वर्षा के पानी को रोका जा सके और सूखे मौसम में भी जल उपलब्धता बनी रहे।
कृष्णी नदी जनपद की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवनरेखा है। अभियान के तहत गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीणों को यह समझाया जाएगा कि नदी में कचरा, पॉलिथीन, अपशिष्ट या घरेलू गंदगी डालने से किस प्रकार जल प्रदूषण बढ़ता है और इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य, कृषि और पशुपालन पर पड़ता है। स्वच्छता के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन को भी इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
नगर विकास विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से यह भी प्रयास किया जाएगा कि नदी से जुड़े गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि गंदा पानी और कचरा सीधे नदी में न पहुंचे। जहां आवश्यक होगा, वहां सोख्ता गड्ढे, नालियों का सुधार किया जाएंगे। सफाई के बाद नदी की स्थिति का समय-समय पर आकलन किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्पष्ट कहा कि जनपद की नदियों का जीर्णोद्धार और निर्मलीकरण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि कृष्णी नदी जिन गांवों से होकर गुजरती है, वहां माइक्रो लेवल एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इस योजना के तहत अतिक्रमण, जल स्रोतों की स्थिति, पौधारोपण की संभावना और सफाई कार्य—सभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाएगा।
जानिए कृष्णी नदी के बारे में
कृष्णी नदी सहारनपुर से निकलकर शामली होकर बागपत के असारा गांव में प्रवेश करती है और बागपत के बरनावा गांव में महाभारतकालीन लाक्षागृह पर हिंडन नदी में मिलती है एवं यमुना की सहायक नदी है। इसे बागपत जनपद से एक जनपद एक नदी योजना हेतु भी चयनित कर भेजा गया है।
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