बागपत: निवाड़ा गांव के सैकड़ों लोग मतदान से हुए वंचित
बागपत। उत्तरप्रदेश के बागपत जिले में सैकड़ों लोगों के वोट काट दिए गए है। निवाड़ा गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से शिकायत की है और वोट का अधिकार मांगा है। एडीएम बागपत ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। मामला बागपत जिले के निवाड़ा गांव का है। गांव निवासी रविंद्र बालियांन ने बताया कि गांव में सैकड़ो ऐसे लोग हैं,जो घूमंतू जाति से आते है और दो दशक से बागपत के निवाड़ा गांव में रह रहे है। यहीं पर उन्होंने पक्के मकान भी बना लिए है। उनको गांव में वोट का अधिकार भी दिया गया था। उनके आधार कार्ड भी बने हुए है।
लेकिन मुस्लिम बहुल गांव होने के कारण यहां ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर उनके साथ राजनीतिक षड्यंत्र के चलते वोटर लिस्ट से नाम काट दिए गए है। ग्राम प्रधान पर वोट कटवाने का आरोप लगाते हुए लोगड़ियां लुहार समुदाय के लोगों ने जिला प्रशासन से वोट बनवाने की अपील की है। शिकायत में कहा गया है कि 800 से 1200 वोट काटे गए हैं। जिन्हें जुड़वाने की मांग की जा रही है। ग्राम पंचायत चुनाव आने वाले हैं जिसको लेकर सारा मामला गरमाया हुआ है। बीएलओ द्वारा भी उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है क्योंकि लोग हिंदू समुदाय के लोगड़ियां लुहार जाति से आते हैं जो अशिक्षित हैं। उनको लिखना पढ़ना भी नहीं आता है। जिससे उनका उत्पीड़न किया जा रहा है और वोटिंग के अधिकार से उनको वंचित कर दिया गया है।
एडीएम बागपत विनीत कुमार उपाध्याय का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। टीम बनाई गई है जो मौके पर जाकर उनके सभी जरूरी दस्तावेज देखेगी। अगर वह सही पाए जाते हैं तो सभी के वोट बनाए जाएंगे कोई भी वोट मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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