जन्माष्टमी पर बेटे की 'पापा जल्दी घर आना' वाली मासूम अपील रह गई अधूरी, हाईवे पर चालक की अचानक मौत
फतेहपुर से ट्रक खाली कर लौट रहे पचनेही निवासी हरिराम की तबीयत बिगड़ने से मौत, परिवार में छाया मातम
बांदा में जन्माष्टमी के दिन पचनेही निवासी 47 वर्षीय ट्रक चालक हरिराम यादव की हाईवे पर अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। सुबह 10 साल के बेटे ने फोन पर जल्दी घर आने को कहा था। मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।
बांदा: बांदा जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र में स्थित पचनेही गांव के रहने वाले 47 साल के ट्रक चालक हरिराम यादव की अचानक सेहत बिगड़ने से मौत हो गई। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बांदा-टांडा नेशनल हाईवे पर मुंगुस गांव के पास यह हादसा हुआ। उसी दिन घर पर जन्माष्टमी की तैयारियां चल रही थीं और पूरा परिवार हरिराम के लौटने की राह देख रहा था। सुबह ही उनके 10 साल के बेटे शिवम ने फोन पर अपने पिता से कहा था कि "पापा, आज जल्दी घर आना..."। मगर दोपहर में अचानक आई उनकी मौत की खबर ने परिवार की तमाम खुशियों को मातम में बदल दिया।
फतेहपुर से लौटते समय हाईवे पर बिगड़ी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार 47 वर्षीय हरिराम यादव पेशे से ट्रक चालक थे और अपने परिवार का पेट पालने के लिए ट्रक चलाते थे। वह फतेहपुर से अपने ट्रक का माल खाली करने के बाद बांदा स्थित अपने घर वापस आ रहे थे। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे सफर के दौरान उन्होंने बांदा-टांडा नेशनल हाईवे पर मुंगुस गांव के आगे सिंहवाहिनी ढाबे के पास अपना ट्रक सड़क किनारे खड़ा किया। इसके बाद वह ट्रक से नीचे उतरे और पैदल ही सड़क पार करने लगे। तभी अचानक रास्ते में उनकी तबीयत खराब हो गई। देखते ही देखते हरिराम यादव हाईवे पर गश खाकर जमीन पर गिर पड़े।अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को इस बारे में जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और हरिराम को इलाज के लिए तुरंत पीएचसी तिंदवारी लेकर गई। वहां अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पीएचसी के डॉ. श्रेयांश गौतम ने बताया कि प्रथम दृष्टया दिल का दौरा पड़ने से मौत होने की आशंका है। हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस ने कागजी पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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हरिराम यादव के निधन की खबर जब उनके गांव पचनेही पहुंची तो जन्माष्टमी की खुशियां सन्नाटे में बदल गईं। घर में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां चल रही थीं और बच्चे आस लगाए बैठे थे कि शाम को पिता घर आएंगे तो सब साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। 10 वर्षीय बेटे शिवम ने सुबह फोन पर पिता से जल्दी लौटने को कहा था। पिता ने भी काम निपटाकर जल्दी घर पहुंचने की सोच रखी थी। लेकिन इस हादसे के बाद मासूम बेटे की वह अपील हमेशा के लिए अधूरी रह गई।
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हरिराम यादव ही मेहनत-मजदूरी करके अपने पूरे परिवार का खर्चा चलाते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी मालती देवी के अलावा दो बेटे और पांच बेटियां हैं। ट्रक चलाकर वह अपनी पत्नी और सातों बच्चों का भरण-पोषण कर रहे थे। अचानक हुए इस हादसे के बाद पत्नी मालती देवी और उनके सात बच्चों के सामने गुजर-बसर का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पति को खोने के बाद पत्नी मालती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में त्योहार की रौनक होनी थी, वहां अब केवल गम और अपनों को खोने का दर्द बचा है।
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