जानकारी के अनुसार अर्जुन का परिवार पिछले करीब पंद्रह वर्षों से मुस्लिम बहुल इलाके में रह रहा था। पड़ोसियों के साथ उनका पारिवारिक और भावनात्मक रिश्ता बना हुआ था। जैसे ही अर्जुन की मौत की खबर इलाके में फैली, पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन जब इस असहनीय दुख से टूट गए, तब मुस्लिम समुदाय के लोग आगे आए और हर कदम पर उनके साथ खड़े नजर आए।
अंतिम संस्कार के समय मुस्लिम युवकों ने अर्जुन की अर्थी को कंधा दिया और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कराया। श्मशान घाट तक पहुंचे इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। लोगों का कहना था कि उस पल न कोई धर्म था, न कोई मजहब, सिर्फ इंसानियत थी।
ये भी पढ़ें वाराणसी : पार्कों के सुंदरीकरण में लापरवाही मामले में नगर निगम ने दो फर्मों पर लगाया जुर्मानास्थानीय लोगों का कहना है कि अर्जुन और उसका परिवार हमेशा मोहल्ले में सभी के साथ मिलजुल कर रहते थे। यही वजह रही कि जब दुख की घड़ी आई तो पूरा इलाका एक परिवार की तरह खड़ा दिखाई दिया। इस घटना ने साबित कर दिया कि सच्चा धर्म मानवता है और आपसी प्रेम व सौहार्द से ही समाज मजबूत होता है।
हापुड़ से सामने आई यह घटना न सिर्फ इलाके बल्कि पूरे देश को यह संदेश देती है कि मुश्किल समय में अगर इंसान इंसान के काम आ जाए, तो हर दीवार अपने आप गिर जाती है।

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