हरदोई में सनसनी: डिप्टी कमिश्नर के भाई की घर में घुसकर हत्या, पिता की भी हुई थी इसी तरह हत्या
मरने से पहले कांपती आवाज में बोला विजय- 'अभी जिंदा हूं, भाई को आने दो'; तड़पते हुए गांव के हमलावरों के नाम किए उजागर, गैस एजेंसी विवाद में फिर बहा खून
हरदोई। जनपद के पाली थाना क्षेत्र के मुड़रामऊ गांव में शनिवार तड़के रंजिश की आग में एक और जिंदगी खाक हो गई। मथुरा में तैनात डिप्टी कमिश्नर (उद्योग) रावेंद्र कुमार के छोटे भाई विजय प्रताप (35) की हमलावरों ने घर में घुसकर बांके से प्रहार कर नृशंस हत्या कर दी। खून से लथपथ विजय ने अस्पताल ले जाते समय अदम्य साहस का परिचय देते हुए न केवल हमलावरों के नाम बताए, बल्कि अपने बड़े भाई के आने तक मौत से जूझते रहने की बात भी कही। दुखद यह है कि तीन साल पहले विजय के पिता की भी ठीक इसी अंदाज में हत्या की गई थी।
तड़के 5 बजे मौत बनकर आए हमलावर जानकारी के अनुसार, विजय प्रताप अपनी वृद्ध मां गोमती (78) के साथ पैतृक गांव में रहते थे। शनिवार सुबह करीब 5 बजे, जब गांव में सन्नाटा था, हमलावर दीवार फांदकर घर में दाखिल हुए और सो रहे विजय पर बांके से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वार इतना घातक था कि विजय की अंतड़ियां बाहर निकल आईं। चीख-पुकार सुनकर जब मां और पड़ोसी पहुंचे, तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।
'मैं अभी मरा नहीं हूं, भाई को बुलाओ' मौके पर मौजूद पड़ोसियों ने जब विजय को उठाकर अस्पताल ले जाने की कोशिश की, तो उन्होंने कड़कती आवाज में कहा, "मैं अभी मरा नहीं हूं, जिंदा हूं। अभी कहीं मत ले जाओ, मेरे भाई को आने दो।" तड़पते हुए विजय ने अपनी बाहर निकली अंतड़ियों को समेटने का प्रयास किया और मां को बताया कि गांव के ही इंद्रपाल ने अपने दो साथियों के साथ पूरी साजिश के तहत उस पर हमला किया है। हालांकि, गंभीर हालत को देखते हुए पड़ोसी उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
3 साल पहले पिता की भी हुई थी हत्या यह इस परिवार के साथ हुई दूसरी बड़ी वारदात है। जून 2023 में डिप्टी कमिश्नर के पिता दयाराम (75) की भी बांके से काटकर हत्या कर दी गई थी। पिता ने भी मरने से पहले हमलावरों के नाम उजागर किए थे। इस खूनी रंजिश की जड़ में 'भारत गैस एजेंसी' का विवाद बताया जा रहा है।
गैस एजेंसी का विवाद और पुरानी रंजिश पुलिस जांच में सामने आया कि विजय प्रताप के नाम वर्ष 2013 में गैस एजेंसी मंजूर हुई थी, जिसे गांव के ही दबंग महावीर ने साजिश रचकर निरस्त करवा दिया था। बाद में महावीर ने फर्जी तरीके से अपने नाम एजेंसी करा ली। दयाराम (पिता) ने कोर्ट के माध्यम से महावीर को जेल भिजवाया और उसकी एजेंसी निरस्त करा दी। इसी खुन्नस में पहले पिता और अब बेटे की बलि ले ली गई।
पुलिस की कार्रवाई एसपी हरदोई ने बताया कि मां गोमती के बयान और विजय के 'डाइंग डिक्लेरेशन' (मरने से पहले दिया गया बयान) के आधार पर इंद्रपाल और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
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