सुप्रीम कोर्ट का फैसला : मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का अवैध निर्माण छह सप्ताह में गिराए, अगली सुनवाई 3 फरवरी को
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए प्रदेश सरकार को अवैध निर्माण गिराने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कि आपके पास बहुत बुलडोजर हैं फिर अवैध निर्माण को गिराने में इतनी देर क्यों। इसी के साथ शहर के पुराने इलाकों में जर्जर इमारतों पर बन रहे कॉम्पलेक्स और दुकानों के निर्माण पर भी सुनवाई हुई। अब सुप्रीम कोर्ट में मेरठ में हो रहे अवैध निर्माण मामले में 3 फरवरी को सुनवाई होनी है। मेरठ शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट में मेरठ शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि छह सप्ताह के भीतर शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। न्यायाधीशों ने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आपके पास बहुत बुलडोजर हैं अब चलाइए उनको। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेश को परिवर्तित करने से इनकार करती है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार के इस अनुरोध को ठुकरा दिया कि अवैध निर्माणों के विनियमितिकरण के प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के कक्ष संख्या 6 में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता मलखान सिंह ने व्यापारियों के हित में आवास विकास परिषद का पक्ष रखा। जिसमें अवैध निर्माणों के नियमितीकरण की गुहार लगाई थी। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की समय-सीमा
तुषार जैन ने बताया कि अदालत ने निर्देश दिया है कि छह सप्ताह की अवधि के भीतर सभी प्रकार के अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर ध्वस्तीकरण की अनुपालन रिपोर्ट याचिकाकर्ता के वकील के माध्यम से कोर्ट को सौंपी जाए। सुनवाई के दौरान सेंट्रल मार्केट के कई व्यापारी उपस्थित रहे। व्यापारी अदालती फैसले से मायूस हो गए।
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