शंकराचार्य के शिष्यों के साथ अभद्रता पर मानवाधिकार आयोग सख्त; पुलिस कमिश्नर को दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
प्रयागराज । तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित अभद्रता और मारपीट का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग की दहलीज तक पहुँच गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव द्वारा दाखिल की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने प्रयागराज पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
संविधान प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन का आरोप: शिकायतकर्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने आयोग को बताया कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य जी के धार्मिक काफिले को त्रिवेणी संगम जाने से बलपूर्वक रोका गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जहाँ अन्य संत समुदायों और अखाड़ों को स्नान की अनुमति थी, वहीं शंकराचार्य जी के शिष्यों के साथ चयनात्मक आधार पर भेदभाव किया गया। उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिससे मौके पर भारी तनाव व्याप्त हो गया। अधिवक्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) का सीधा उल्लंघन बताया है।
निष्पक्ष जांच की मांग: शिकायत में मांग की गई है कि मेला प्रशासन और पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया तथा बल-प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए। डॉ. यादव ने तर्क दिया कि यदि भीड़ नियंत्रण के लिए प्रतिबंध आवश्यक था, तो वह सभी के लिए समान होना चाहिए था। अपमानजनक व्यवहार और भेदभावपूर्ण प्रशासनिक हस्तक्षेप मानवाधिकारों का हनन है। आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब प्रयागराज पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय होने की उम्मीद जगी है।
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