ब्रह्मांड के ऊर्जा केंद्र 'सूर्य' की आराधना; जानें वैज्ञानिक महत्व, राशि अनुसार सरल उपाय और जीवन में सफलता का मार्ग
सृष्टि के आदि काल से ही सूर्य को समस्त ऊर्जा का स्रोत और साक्षात देव माना गया है। वैदिक ऋचाओं से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, सूर्य की महत्ता निर्विवाद है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है, जिसका अर्थ है कि बिना सूर्य की कृपा के व्यक्ति के व्यक्तित्व में वह तेज और आत्मविश्वास नहीं आ सकता, जो उसे सफलता के शिखर तक ले जाए।
राशि अनुसार सूर्य उपासना के विशेष उपाय:
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मेष, सिंह और धनु राशि: इन राशियों का स्वामी तत्व अग्नि है। इन्हें रविवार के दिन तांबे के पात्र से जल में लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। यह उपाय इनके नेतृत्व गुणों और कार्यक्षमता में वृद्धि करता है।
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वृष, कन्या और मकर राशि: पृथ्वी तत्व की इन राशियों को सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रविवार को गुड़ और गेहूं का दान करना चाहिए। इससे आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और करियर में स्थिरता आती है।
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मिथुन, तुला और कुंभ राशि: वायु तत्व की इन राशियों के लिए रविवार को गायत्री मंत्र का मानसिक जाप करना सर्वोत्तम है। इससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और भ्रम की स्थिति समाप्त होती है।
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कर्क, वृश्चिक और मीन राशि: जल तत्व की इन राशियों को सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल में अक्षत (चावल) और सफेद फूल डालने चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
जीवन में सफलता का सूत्र रविवार का दिन आत्म-अवलोकन का दिन है। जिस प्रकार सूर्य अपनी तपन से तपकर संसार को आलोकित करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने पुरुषार्थ और कठोर परिश्रम से अपने भाग्य को संवारना चाहिए। यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में है या आपको उचित सम्मान नहीं मिल रहा है, तो रविवार के दिन नमक का त्याग करना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चमत्कारिक परिणाम दे सकता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से धर्मनगरी वृंदावन के निवासी पंडित ब्रज बिहारी अत्री मुज़फ्फरनगर के आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र का एक प्रमुख चेहरा हैं। वर्तमान में वे मुज़फ्फरनगर में अर्चक पुरोहित संघ के जिलाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पंडित अत्री जी की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध है; उन्होंने ज्योतिष की गहन शिक्षा हनुमानगढ़ (राजस्थान) के सुप्रसिद्ध पंडित लक्ष्मण दास जी से प्राप्त की है।
पंडित ब्रज बिहारी अत्री जी को कर्मकांड की विद्या विरासत में मिली है। उन्होंने अपने दादा पंडित ख्यालीराम जी और पिता पंडित कृष्ण जीवन अत्री जी के मार्गदर्शन में सनातन परंपराओं को आत्मसात किया। इसके साथ ही, उन्होंने पंडित सीताराम चतुर्वेदी जी से व्याकरण की सूक्ष्म बारीकियों की शिक्षा ग्रहण की। अपनी पारिवारिक विरासत और गुरुओं से प्राप्त ज्ञान के माध्यम से वे मुज़फ्फरनगर में धार्मिक अनुष्ठानों और पुरोहित समाज के हितों के लिए निरंतर समर्पित हैं। धार्मिक परामर्श या अनुष्ठान हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9412842153 पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।
