मुजफ्फरनगर में किसान नेता ने की एक लाख की वसूली की कोशिश, नहीं मिले तो चौकी पर दे दिया धरना, पोल खुली तो भाग लिए !
मुजफ्फरनगर। जनपद के चरथावल क्षेत्र स्थित हिंडन पुलिस चौकी पर उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब कुछ किसान नेताओं द्वारा धरना-प्रदर्शन की आड़ में अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि ईंट-भट्ठों के लिए मिट्टी उठाने के नाम पर किसान और भट्ठा संचालक से ₹1 लाख की अवैध मांग की गई। जैसे ही मिट्टी उठाने से संबंधित वैध दस्तावेज पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए गए, धरने की सच्चाई उजागर हो गई और प्रदर्शनकारी मौके से खिसक गए।
मौके पर मौजूद भट्ठा मुनीम और अन्य किसानों ने पुलिस के समक्ष आरोप लगाया कि यह धरना किसानों के हित में नहीं, बल्कि अवैध वसूली और निजी स्वार्थ के लिए किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान जब किसान चरणसिंह द्वारा मिट्टी उठाने की वैध अनुमति से संबंधित दस्तावेज पुलिस के सामने प्रस्तुत किए गए, तो पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ गई।
दस्तावेज सामने आते ही किसान नेताओं की पोल खुल गई, जिसके बाद धरना दे रहे लोग धीरे-धीरे मौके से निकल गए। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और किसानों में ऐसे कथित किसान नेताओं को लेकर भारी रोष देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से वास्तविक किसान आंदोलनों की छवि भी खराब हो रही है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के सहारनपुर मंडल अध्यक्ष कुशलवीर सिंह निवासी कसौली पर मिट्टी उठाने के बदले ₹1 लाख की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर किए जाने की बात कही जा रही है।
वहीं, इस मामले में भाकियू (अराजनैतिक) नेता कुशलवीर सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं। उनका आरोप है कि जिले में पुलिस और माफियाओं का गठजोड़ चल रहा है और इसी कारण उन्हें बदनाम किया जा रहा है।
कुशलवीर सिंह का कहना है कि पिपलाशाह निवासी जिस किसान के खेत से मिट्टी उठाई जा रही थी, उसने बहुत अधिक गहराई तक मिट्टी उठवा ली थी, जिससे आसपास के किसानों को भारी परेशानी हो रही थी। आसपास के किसानों ने ही इस मामले की शिकायत उनके समक्ष रखी थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस से भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मजबूरन किसानों के साथ धरना-प्रदर्शन करना पड़ा।
इस पूरे प्रकरण में चरथावल पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुलिस अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। फिलहाल मामले को लेकर जांच जारी है और क्षेत्र में इसे लेकर चर्चाएं तेज बनी हुई हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
