मेरठ में योगी ने संगीत सोम को किया पीछे, राज्यमंत्री दिनेश खटीक को बुलाया आगे, वीडियो वायरल
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मेरठ दौरा न केवल विकास कार्यों के निरीक्षण के लिए, बल्कि एक "सियासी इशारे" के लिए भी सुर्खियों में आ गया है। सलावा क्षेत्र में निर्माणाधीन मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने जिस तरह से पूर्व विधायक संगीत सोम को पीछे कर राज्यमंत्री दिनेश खटीक को आगे बुलाया, उसने जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिकारियों से निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ले रहे थे, उस समय सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम मुख्यमंत्री के ठीक बगल में खड़े थे। तभी मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से संगीत सोम को पीछे हटने का संकेत दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा— “मंत्री जी को आगे आने दीजिए।”
मुख्यमंत्री का इशारा पाते ही पीछे खड़े जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक आगे बढ़े और मुख्यमंत्री के साथ खड़े होकर निरीक्षण में शामिल हुए। कुछ ही सेकंड का यह घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर बिजली की गति से वायरल हो रहा है।
प्रोटोकॉल या राजनीतिक संदेश?
इस वायरल वीडियो ने सियासी हलकों को दो हिस्सों में बांट दिया है:
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प्रोटोकॉल का तर्क: भाजपा के एक धड़े का कहना है कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक प्रोटोकॉल का मामला था। मुख्यमंत्री के साथ निरीक्षण के दौरान कैबिनेट या राज्यमंत्री का रहना अनिवार्य है। चूंकि संगीत सोम वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने केवल व्यवस्था का पालन सुनिश्चित किया।
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सियासी संदेश की चर्चा: वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगीत सोम के हालिया विवादों और पुलिस अधिकारियों से हुई उनकी कथित नोकझोंक के बाद, मुख्यमंत्री का यह सार्वजनिक इशारा एक बड़ा संदेश हो सकता है। इसे भाजपा के भीतर समीकरणों के बदलने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्ष ने साधा निशाना
इस वीडियो को लेकर विपक्षी दलों ने भी भाजपा पर तंज कसना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह वीडियो भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी और खींचतान को उजागर करता है। हालांकि, स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे 'बेवजह तूल' देने की कोशिश करार दिया है।
फिलहाल, मेरठ की फिजाओं में मुख्यमंत्री का यह "पीछे हटने का इशारा" आने वाले चुनाव और स्थानीय संगठन की भविष्य की राजनीति के लिए कई कयासों को जन्म दे चुका है।
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