पूर्व आईएएस बादल चटर्जी व शंकर सिंह को उनके बैच के पीसीएस अधिकारियों को प्रोन्नत वेतनमान देने का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पीसीएस से आईएएस कैडर में प्रोन्नत प्राप्त बादल चटर्जी और शंकर सिंह को वही प्रोन्नत वेतनमान देने का निर्देश दिया है, जो उनके बैच के उन अधिकारियों को दिया गया जो आईएएस कैडर में प्रोन्नति नहीं पा सके थे।
कोर्ट ने कहा कि इसी प्रकार के मामले में जब पीपीएस से आईपीएस में प्रोन्नत राजेश कुमार श्रीवास्तव को बढ़े वेतनमान का लाभ दिया गया है तो याचियों से इस आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता कि उनका कैडर अलग है। कोर्ट ने कहा कि दोनों कैडर की सेवा शर्तें समान हैं।
बादल चटर्जी व शंकर सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने राज्य सरकार के अधिकारियों की इस बात के लिए आलोचना भी की कि सभी बातें याचियों के पक्ष में होने के बावजूद उन्हें उन्हीं के विभाग के कनिष्ठ अधिकारियों से कमतर आंकना स्पष्ट रूप से लाल फ़ीताशाही को दर्शाता है।
मामले के तथ्यों के अनुसार याची 1979 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। 2011 में वे आईएएस कैडर में प्रोन्नत हुए। इस दौरान याची राज्य सिविल सेवा की लाइन में ही रहे जबकि उनके बैच के वे अधिकारी जो आईएएस कैडर में प्रोन्नत नहीं हो सके, उन्हें 67,000 से 79,000 का बढ़ा वेतनमान दे दिया गया।
याचियों ने भी इसी वेतनमान की मांग को लेकर प्रत्यावेदन दिया लेकिन उसे नामंजूर कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने कैट में याचिका दाखिल की, जिसे अधिकरण ने खारिज़ कर दिया। इस पर हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई।
याचियों का कहना था कि इसी प्रकार के मामले में कैट की लखनऊ पीठ ने पीपीएस से आईपीएस में प्रोन्नत राजेश कुमार श्रीवास्तव के पक्ष में निर्णय दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याचियों को बढ़ा वेतनमान सभी एरियर छह प्रतिशत ब्याज के साथ दो माह में भुगतान करने का निर्देश दिया।
