टमाटर की टॉप हाइब्रिड किस्में जो बना सकती हैं लखपति, फरवरी में रोपाई और 100 टन तक पैदावार का मौका
क्या आप जानते हैं कि टमाटर की सही हाइब्रिड किस्म चुनकर एक ही सीजन में तगड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। अगर फरवरी में रोपाई की जाए तो अप्रैल और मई की गर्मी में फसल तैयार होती है। इस समय बाजार में आवक कम रहती है और दाम ऊंचे मिलते हैं। यही वजह है कि सही किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाने से यह खेती जैकपॉट साबित हो सकती है।
फरवरी में रोपाई क्यों देती है सबसे ज्यादा फायदा
फरवरी में लगाई गई फसल लगभग 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। जब अप्रैल और मई में भीषण गर्मी के कारण उत्पादन घटता है तब यही फसल बाजार में पहुंचती है। कम सप्लाई और ज्यादा मांग के कारण दाम अक्सर ऊंचे मिलते हैं। इस समय सही किस्म का चुनाव सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।
ये भी पढ़ें राय के साग की खेती से धमाकेदार कमाई शून्य लागत में बंपर उत्पादन , से बदल रही किसानों की तकदीरसेमिनिस की अभिलाष किस्म अपनी मजबूती और सख्त फलों के कारण खास मानी जाती है। इसके गहरे लाल और गोल फल लंबी दूरी तक खराब नहीं होते। वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ यह 70 से 80 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन दे सकती है और 65 से 70 दिन में तुड़ाई शुरू हो जाती है।
ये भी पढ़ें Profitable Kaddu Farming Technique: 45 दिन में तैयार होने वाली फसल से कम लागत में 80 हजार तक की कमाईभारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित अर्का रक्षक एक क्रांतिकारी किस्म मानी जाती है। यह पत्ती लपेटक वायरस अगेती झुलसा और बैक्टीरियल विल्ट जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी है। औसतन 75 से 80 टन उत्पादन देती है और अनुकूल स्थिति में 100 टन तक पहुंच सकती है। इसके बड़े और आकर्षक फल बाजार में तेजी से बिकते हैं।
बंपर उत्पादन और प्रीमियम दाम दिलाने वाली उन्नत किस्में
सिंजेंटा 6242 उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो अधिकतम उत्पादन चाहते हैं। इसके फल एक समान आकार के और चमकदार होते हैं। उचित खाद और सिंचाई के साथ यह 80 से 90 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है और रिटेल बाजार में बेहतर दाम दिलाती है।
हिमशिखर किस्म विपरीत मौसम को सहने की क्षमता के लिए जानी जाती है। बढ़ती गर्मी और अचानक ठंड दोनों को झेल सकती है। यह 65 से 75 टन तक पैदावार देती है और इसके पौधों में गुच्छों में भारी मात्रा में फल लगते हैं।
काशी विशेष कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर मानी जाती है। यह लगभग 60 दिनों में तैयार हो जाती है। उत्पादन क्षमता 50 से 60 टन प्रति हेक्टेयर रहती है। इसके मध्यम आकार के रसीले फल स्थानीय बाजार में तेजी से बिकते हैं।
केवल बीज से ही चमत्कार नहीं होता। मल्चिंग पेपर और ड्रिप सिंचाई अपनाने से उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। संतुलित एनपीके खाद और समय पर दवा का उपयोग करने से प्रति पौधा 5 से 8 किलो तक उत्पादन संभव है। सही समय पर फसल को बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि मुनाफा केवल पैदावार से नहीं बल्कि सही दाम से तय होता है।
फरवरी में लगाई गई इन हाइब्रिड किस्मों के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर प्रति एकड़ 2 से 3 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ कमाया जा सकता है। सही योजना और वैज्ञानिक तरीके इस खेती को वाकई लखपति बनाने वाली फसल में बदल सकते हैं।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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