Profitable Kaddu Farming Technique: 45 दिन में तैयार होने वाली फसल से कम लागत में 80 हजार तक की कमाई
आज के समय में खेती सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि समझदारी और सही तकनीक का खेल बन चुकी है। देश के कई इलाकों में किसान पारंपरिक गेहूं धान की खेती से आगे बढ़कर अब सब्जियों की ओर रुख कर रहे हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। कद्दू की खेती इसका सबसे अच्छा उदाहरण बनकर सामने आ रही है जहां कम लागत में ज्यादा मुनाफा संभव हो पा रहा है।
Profitable Kaddu Farming से बदल रही किसानों की आमदनी
पारंपरिक फसलों से हटकर सब्जियों की ओर बढ़ता रुझान
अब किसान गेहूं और धान जैसी फसलों के बजाय सब्जियों की खेती को ज्यादा फायदेमंद मानने लगे हैं। सब्जियों की खेती में जोखिम जरूर होता है लेकिन मुनाफा भी कई गुना ज्यादा मिलता है। कद्दू की खेती इसी बदलाव की मिसाल है जहां कम समय में फसल तैयार होती है और बाजार में जल्दी बिक जाती है।
मल्चिंग तकनीक से बढ़ा उत्पादन और घटा खर्च
कद्दू की खेती में मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ है। इस तकनीक में खेत की क्यारियों पर प्लास्टिक शीट या मल्चिंग पेपर बिछाया जाता है। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है। साथ ही खरपतवार नहीं उगते जिससे निराई गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है। इस वजह से खेती की कुल लागत काफी कम हो जाती है।
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एक बीघा जमीन में कद्दू की खेती की लागत बहुत ज्यादा नहीं आती। बीज खाद और अन्य खर्च मिलाकर लागत सीमित रहती है जबकि एक ही फसल से 70 से 80 हजार रुपये तक का मुनाफा आसानी से हो सकता है। यही कारण है कि यह खेती अब तेजी से लोकप्रिय हो रही है। बाजार में कद्दू की मांग लगातार बनी रहती है जिससे किसानों को सही समय पर सही कीमत मिल जाती है।
45 दिनों में तैयार होने वाली फसल
कद्दू की खेती की प्रक्रिया भी काफी आसान है। खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद खाद मिलाकर बेड तैयार किए जाते हैं। इन बेड्स पर मल्चिंग पेपर बिछाकर बीज बोए जाते हैं। बुवाई के करीब 40 से 45 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद यह फसल करीब डेढ़ से दो महीने तक लगातार फल देती रहती है जिससे किसान को नियमित आमदनी मिलती रहती है।
बाजार में बेहतर दाम दिलाती है अच्छी क्वालिटी
मल्चिंग तकनीक से उगे कद्दू मिट्टी के सीधे संपर्क में नहीं आते जिससे उनकी चमक और गुणवत्ता बनी रहती है। यही वजह है कि बाजार में इन्हें सामान्य फसल की तुलना में बेहतर दाम मिलते हैं। अच्छी क्वालिटी की वजह से व्यापारी भी इन्हें हाथों हाथ खरीद लेते हैं।
अगर किसान सही जानकारी और आधुनिक तकनीक के साथ कद्दू की खेती करें तो यह खेती कम समय में बड़ा मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है। कम लागत ज्यादा उत्पादन और अच्छी बाजार मांग इसे भविष्य की फायदेमंद खेती बना रही है।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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