गर्मी में भिंडी की खेती से कमाएं तगड़ा मुनाफा कम समय में तैयार फसल देगी 20 टन तक पैदावार और जबरदस्त कमाई
अगर आप रबी फसलों की कटाई के बाद खाली पड़े खेत से अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं तो गर्मियों में सब्जी की खेती आपके लिए सुनहरा मौका बन सकती है। गिलकी करेला लौकी के साथ भिंडी की खेती इस सीजन में खास फायदा देती है। सही किस्म का चुनाव कर लिया जाए तो कम समय में अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता दोनों मिल सकते हैं।
क्यों है भिंडी की खेती फायदेमंद
गर्मी के मौसम में बाजार में हरी सब्जियों की मांग बढ़ जाती है। भिंडी ऐसी सब्जी है जिसकी खपत हर घर में रहती है। यही वजह है कि इसकी खेती से किसानों को अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया मिलता है। सही प्रबंधन और उन्नत किस्म के साथ यह फसल अच्छा उत्पादन देती है और बाजार में बेहतर दाम भी दिलाती है।
यह है उन्नत किस्म CT 106
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित CT 106 भिंडी की एक उन्नत किस्म मानी जाती है। यह खेत और घर के बगीचे दोनों के लिए उपयुक्त है। यह किस्म तीनों सीजन रबी खरीफ और जायद में उगाई जा सकती है। इसकी खासियत यह है कि यह येलो मोजेक रोग के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है जिससे फसल को बड़ा नुकसान होने का खतरा कम रहता है।
ये भी पढ़ें गमले में टमाटर उगाने का सही तरीका 18 इंच गमला, खास मिट्टी और ऑर्गेनिक खाद से पाएं ढेरों लाल टमाटरराष्ट्रीय बीज निगम द्वारा CT 106 के बीज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 10 ग्राम का पैकेट छूट के साथ लगभग 92 रुपये में मिल रहा है। किसान इसे ऑनलाइन मंगवा कर आसानी से अपने खेत में बुवाई कर सकते हैं।
उत्पादन और गुणवत्ता में आगे
यह किस्म बुवाई के लगभग 3 से 4 महीने बाद तैयार हो जाती है। इसकी फलियां मुलायम और स्वादिष्ट होती हैं जिससे बाजार में अच्छी मांग रहती है। प्रति हेक्टेयर करीब 18 से 20 टन तक उत्पादन लिया जा सकता है। इसका डंठल लंबा होता है जिससे तुड़ाई करना आसान हो जाता है और श्रम की बचत होती है।
भिंडी की बुवाई का सही तरीका
ग्रीष्मकालीन भिंडी की बुवाई का सही समय फरवरी से मार्च है। बीज को बुवाई से पहले पीला मोजेक रोग से बचाव के लिए उचित दवा से उपचारित करना चाहिए। बीज दर 20 से 22 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें। बीज की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर से अधिक न रखें।
बुवाई से पहले खेत में 2 से 2.5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। उर्वरक के रूप में नत्रजन स्फुर और पोटाश की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय दें और शेष मात्रा 30 से 40 दिन के अंतराल पर दो बार में दें। गर्मी में 5 से 7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें और 10 से 12 दिन में निराई गुड़ाई अवश्य करें।
अगर सही समय पर सही किस्म के साथ भिंडी की खेती की जाए तो यह फसल कम समय में अच्छी आमदनी का मजबूत साधन बन सकती है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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