प्लास्टिक मल्चिंग से बढ़ेगी सब्जी की पैदावार कम खर्च में ज्यादा उत्पादन जानिए खेती का आसान तरीका
आज के समय में खेती करना पहले की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। खेती में लागत लगातार बढ़ रही है जबकि कई बार किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल पाता। खासतौर पर सब्जी की खेती करने वाले किसानों के सामने यह समस्या और भी ज्यादा दिखाई देती है। ऐसे समय में अगर खेती में कुछ नई तकनीक अपनाई जाए तो कम खर्च में भी अच्छी पैदावार और बेहतर कमाई संभव हो सकती है।
इन्हीं आधुनिक तकनीकों में से एक है प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक। आज यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसल का उत्पादन भी बढ़ता है।
प्लास्टिक मल्चिंग खेती के लिए क्यों है बेहतर विकल्प
पहले के समय में किसान खेत की मिट्टी को ढकने के लिए पत्ते सूखी घास या अन्य प्राकृतिक चीजों का उपयोग करते थे। इसे ही पारंपरिक पलवार कहा जाता था। लेकिन आज के समय में यह सामग्री हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती और कई बार इसे लाना भी मुश्किल होता है।
इसी कारण अब किसान प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग करने लगे हैं। प्लास्टिक मल्चिंग शीट खेत की मिट्टी को ढकने का काम करती है। यह हल्की होती है और इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होता है। इसी वजह से आज कृषि क्षेत्र में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
प्लास्टिक मल्चिंग से फसल को मिलते हैं कई फायदे
जब खेत में प्लास्टिक मल्चिंग लगाई जाती है तो मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इससे पौधों की जड़ों को लगातार नमी मिलती रहती है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
इसके साथ ही यह मिट्टी के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ती है जो फसल के विकास के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
प्लास्टिक मल्चिंग का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे मिट्टी का कटाव कम होता है और खेत में खरपतवार भी कम उगते हैं। जब खेत में खरपतवार कम होंगे तो पौधों को पोषक तत्व अधिक मिलेंगे और उत्पादन भी बेहतर होगा।
प्लास्टिक मल्चिंग के अलग अलग प्रकार
कृषि में कई प्रकार की प्लास्टिक मल्चिंग शीट का उपयोग किया जाता है। इनमें काला रंग चांदी रंग पीला रंग और लाल रंग की शीट प्रमुख होती हैं। इनमें सबसे ज्यादा उपयोग काले और चांदी रंग की मल्चिंग शीट का किया जाता है।
इनका चयन फसल और क्षेत्र की जरूरत के अनुसार किया जाता है। सामान्य तौर पर लगभग 120 सेंटीमीटर चौड़ी मल्चिंग शीट का उपयोग अधिक किया जाता है ताकि खेती के अन्य काम आसानी से किए जा सकें।
प्लास्टिक मल्चिंग की मोटाई कितनी होनी चाहिए
मल्चिंग शीट की मोटाई भी खेती की अवधि के अनुसार चुनी जाती है। कम अवधि की फसलों के लिए लगभग 20 से 25 माइक्रोन मोटाई की शीट उपयोग की जाती है। मध्यम अवधि की फसलों के लिए लगभग 40 से 45 माइक्रोन मोटाई उपयुक्त मानी जाती है।
लंबी अवधि की फसलों के लिए लगभग 50 से 100 माइक्रोन मोटाई की मल्चिंग शीट का उपयोग किया जाता है। सही मोटाई का चयन करने से मल्चिंग शीट ज्यादा समय तक टिकती है और खेती में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
प्लास्टिक मल्चिंग लगाने का सही तरीका
प्लास्टिक मल्चिंग लगाने से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है। खेत तैयार होने के बाद क्यारियां बनाई जाती हैं और उसके ऊपर मल्चिंग शीट बिछाई जाती है। इसके किनारों को मिट्टी से दबा दिया जाता है ताकि शीट अपनी जगह पर बनी रहे।
आज कई जगह ट्रैक्टर से चलने वाली मल्चिंग मशीन का उपयोग भी किया जाता है जिससे यह काम तेजी और आसानी से पूरा हो जाता है।
मल्चिंग लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान
मल्चिंग लगाने के समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। बीज बोने या पौधे लगाने की जगह पहले से तय कर लेनी चाहिए ताकि मल्चिंग शीट में सही जगह छेद किया जा सके।
अगर खेत में ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जा रहा है तो ड्रिप पाइप को मल्चिंग शीट लगाने से पहले क्यारियों पर बिछा देना चाहिए। इससे पौधों को पानी और पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते रहते हैं।
प्लास्टिक मल्चिंग को हटाने और निस्तारण का तरीका
जब फसल तैयार हो जाती है और खेत से उत्पादन ले लिया जाता है तब मल्चिंग शीट को सावधानी से हटाया जा सकता है। अगर शीट सही स्थिति में हो तो उसे दोबारा भी उपयोग किया जा सकता है।
लेकिन अगर मल्चिंग शीट खराब हो जाए या फट जाए तो उसे खेत से बाहर निकाल देना चाहिए क्योंकि प्लास्टिक मिट्टी में आसानी से नष्ट नहीं होता। अगर इसे खेत में छोड़ दिया जाए तो इससे पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो सकती है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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