पेंगुइन के ट्वीट के बाद भाजपा का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार, कहा- "कपोल कथा" के लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए
नई दिल्ली। पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर पब्लिशर पेंगुइन के ट्वीट के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। भाजपा ने संसद में दिए गए उनके बयानों को "कपोल कथा" बताया और कहा कि उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।
संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने मुकुंद नरवणे के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
जनरल नरवणे द्वारा पब्लिशर पेंगुइन के ट्वीट का समर्थन किए जाने के बाद राहुल गांधी द्वारा पेश की गई काल्पनिक कहानी पूरी तरह से खत्म हो गई है। पेंगुइन ने साफ तौर पर कहा है कि अभी तक ऐसी कोई किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पेंगुइन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी के पास ऐसी किसी किताब की कोई प्रति है, तो वह अलग और अवैध है और यह कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले में अब न तो लेखक और न ही प्रकाशक की ओर से कोई भ्रम की स्थिति बची है, और सच्चाई सबके सामने आ चुकी हैा राहुल गांधी ने कपोल कथा या काल्पिनक कथा सदन की पटल पर सुनाने का काम किया है। लेखक और प्रकाशक दोनों ने स्पष्ट कर दिया है और सच सबके सामने है। अब स्पष्ट हो गया कि कौऩ झूठ बोल रहा है। नेता प्रतिपक्ष झूठ बोल रहे हैं। राहुल गांधी ने देश की संसद का प्रयोग अपनी छोटी राजनीति करने के लिए किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में संदेह उत्पन्न करने का काम निंदनीय है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कुछ ही दिनों पहले नेता सदन जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को अबोध बालक कहा था, लेकिन आज राहुल गांधी शातिर बालक की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उनका यह अपराध माफी के लाय़क नहीं है। उन्हें स्पष्ट रूप से देश से माफी मांगनी चाहिए।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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