अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 19 दस्तावेज वापस लिए, राजनीतिक पक्षपात के आरोप के बाद कार्रवाई
वाशिंगटन। अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) ने 19 खुफिया दस्तावेजों को औपचारिक रूप से वापस ले लेने या उनमें संशोधन का आदेश दिया है। यह कदम एक आंतरिक और स्वतंत्र समीक्षा के बाद उठाया गया, जिसमें पाया गया कि ये रिपोर्टें एजेंसी के विश्लेषणात्मक मानकों पर खरी नहीं उतरतीं और राजनीतिक विचारों से स्वतंत्र नहीं थीं। सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर ये जानकारी दी है। सीआईए निदेशक ने कहा, "पिछले एक दशक में तैयार किए गए ये दस्तावेज निष्पक्षता के उन उच्च मानकों पर खरे नहीं उतरते, जिनका पालन करना चाहिए था और हमारे विश्लेषकों की उस विशेषज्ञता को भी नहीं दर्शाते, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।" ये रिपोर्टें सीआईए डेटाबेस से हटा दी जाएंगी और अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए अब उपलब्ध नहीं होंगी।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर में विहान शोरूम मालिक की कोठी के स्विमिंग पूल में मिला चौकीदार का शव, फैली सनसनीवाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के खुफिया सलाहकार बोर्ड (पीआईएबी) ने जिन 19 दस्तावेज की पहचान की, उनमें 17 रिपोर्टों को वापस लेना और दो अन्य में महत्वपूर्ण संशोधन करना शामिल है। पीआईएबी ने पिछले दशक की सैकड़ों सीआईए विश्लेषणात्मक रिपोर्टों की समीक्षा की। उप निदेशक माइकल एलिस के नेतृत्व में एक आंतरिक समीक्षा ने भी इन निष्कर्षों से सहमति जताई है। सीआईए निदेशक रैटक्लिफ ने उदाहरण के तौर पर तीन रिपोर्टों के संपादित संस्करण भी जारी किए हैं। इनमें 6 अक्टूबर, 2021 को प्रकाशित "श्वेत नस्ली और जातीय हिंसक उग्रवाद के लिए महिलाओं की भूमिका और भर्ती”, "मिडिल ईस्ट–नॉर्थ अफ्रीका: एलजीबीटी कार्यकर्ताओं पर दबाव" (14 जनवरी 2015) और 8 जुलाई 2020 को जारी "विश्वव्यापी महामारी से संबंधित गर्भनिरोधक की कमी और आर्थिक विकास पर प्रभाव" शामिल हैं। रैटक्लिफ ने कहा, “आज अमेरिकी जनता को जो खुफिया दस्तावेज हम जारी कर रहे हैं, वे मेरे कार्यकाल से पहले तैयार किए गए हैं।
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हमारे काम में किसी भी प्रकार का पक्षपात बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। जब हम पाते हैं कि विश्लेषण में निष्पक्षता नहीं रही है, तो हमारा कर्तव्य है कि रिकॉर्ड को सुधारें।” वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, आंशिक रूप से जारी रिपोर्टों में विदेशों में हिंसक श्वेत राष्ट्रवादी समूहों में महिलाओं की भूमिका, इस्लामी दुनिया के कुछ हिस्सों में एलजीबीटी कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों और विकासशील देशों में गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन तक पहुंच पर कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। सीआईए ने कहा कि यह कार्रवाई पारदर्शिता, जवाबदेही और वस्तुनिष्ठ खुफिया विश्लेषण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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