लोकसभा: 'सरके चुनरिया' विवाद पर अश्विनी वैष्णव बोले- गाने पर लगा बैन, अभिव्यक्ति की आजादी की भी सीमा

मुंबई। कन्नड़ फिल्म 'केडी: द डेविल' के विवादित गाने 'सरके चुनरिया' को लेकर चल रहा विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बयान में कहा कि इस गाने पर बैन लगाया जा चुका है। लोकसभा में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गाने पर बैन लगा दिया गया है। हमें अभिव्यक्ति की आजादी (फ्रीडम ऑफ स्पीच) के तहत सही पाबंदियों के हिसाब से काम करना चाहिए लेकिन यह पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती। यह समाज और संस्कृति के मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, ''डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर में कंटेंट बहुत तेजी से फैलता है, ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। खासतौर पर बच्चों और समाज के वंचित वर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जरूरी कदम उठाने होंगे।
सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।'' दरअसल, 'सरके चुनरिया' गाना फिल्म 'केडी: द डेविल' का हिस्सा है, जिसमें नोरा फतेही और संजय दत्त नजर आए थे। गाने के रिलीज होते ही इसके बोल और डांस स्टेप्स को लेकर सोशल मीडिया पर भारी विरोध शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे अश्लील और डबल मीनिंग बताते हुए आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर कई संगठनों ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्ल्यूए) ने इस गाने को तुरंत बैन करने की मांग की और इसे भारतीय सिनेमा की छवि के खिलाफ बताया। उन्होंने सरकार से सख्त नियम बनाने की भी अपील की।
विवाद के बीच गाने को यूट्यूब समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया। इस दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बॉलीवुड में अश्लीलता की हदें पार हो चुकी हैं, जिस पर सख्ती जरूरी है। वहीं विवाद बढ़ने पर गाने के गीतकार रकीब आलम ने भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने इस गाने को मूल रूप से नहीं लिखा था, बल्कि यह कन्नड़ में पहले से लिखा गया था और उन्होंने सिर्फ उसका हिंदी अनुवाद किया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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