भाकियू अराजनैतिक के 4 बड़े नेताओं समेत 400 पर मुकदमा, भड़के भाकियू प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक- "समय आने पर देंगे मुंहतोड़ जवाब"
मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar)। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के हालिया उग्र प्रदर्शन ने जनपद की कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एसएसपी कार्यालय के घेराव के दौरान पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक, वर्दी फाड़ने की धमकी देने और शहर की यातायात व्यवस्था को घंटों ठप रखने के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने चार नामजद नेताओं और करीब 400 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
विदित हो कि 3 जनवरी को फैक्ट्रियों में कचरा (RDF) जलाए जाने के विरोध में भाकियू अराजनैतिक ने एसएसपी कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई। आरोप है कि नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पुलिस अधिकारियों को 'वर्दी फाड़ने' की धमकी दी। हालांकि, धरने के दौरान ही नेताओं ने एसपी सिटी के समक्ष माफीनामा दिया था और माइक से पुलिस का सम्मान करने की बात कही थी, लेकिन एसएसपी संजय वर्मा ने इस व्यवहार को अस्वीकार्य मानते हुए कठोर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए।
एम्बुलेंस का रास्ता रोकने और अभद्रता का आरोप
थाना सिविल लाइन प्रभारी निरीक्षक आशुतोष कुमार की तहरीर के अनुसार, लगभग 400 कार्यकर्ता बिना अनुमति ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। वाहनों को महावीर चौक से लेकर झांसी की रानी चौक तक बेतरतीब ढंग से खड़ा कर दिया गया, जिससे एम्बुलेंस और मरीजों के वाहन भी फंस गए। तहरीर में स्पष्ट उल्लेख है कि धारा 163 बीएनएसएस लागू होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने डंडे लेकर नारेबाजी की और पुलिस कार्यालय से बैनर हटाने को कहने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
इन नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस ने युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगम्बर सिंह (बिजनौर), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी (बुलन्दशहर), मोहित त्यागी और ब्लॉक अध्यक्ष चरथावल ठा. कुशलबीर सिंह समेत 400 अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की धारा 191(2), 132, 126(2), 351(2), 352 और 223 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुकदमे का समय आने पर देंगे मुंहतोड़ जवाब: धर्मेन्द्र मलिक
पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने इसे 'प्रशासन की गुंडागर्दी' करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन अपराध करने वाले उद्योगपतियों के साथ खड़ा है, जिन्हें कचरा जलाकर पर्यावरण खराब करना दिखाई नहीं दे रहा।
धर्मेन्द्र मलिक ने दोटूक कहा, "जनता की आवाज दबाने के लिए मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। अगर किसानों के हक के लिए जेल जाना पड़ा, तो यह हमारा सौभाग्य होगा। हम कचरा माफियाओं से डरने वाले नहीं हैं। प्रशासन की इस दमनकारी नीति का जवाब समय आने पर दिया जाएगा।" उन्होंने बताया कि 26 से 28 जनवरी तक इलाहाबाद में होने वाले किसान चिंतन शिविर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन मुद्दों पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
देखें एफआईआर-
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