आली गांव सीलिंग विवाद: दिल्ली में यूपी सरकार का बुलडोजर एक्शन, 300 से अधिक परिवार बेघर
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के ओखला विधानसभा क्षेत्र (सरिता विहार के पास) स्थित आली गांव की मस्जिद कॉलोनी में उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा की गई सीलिंग की कार्रवाई ने एक बड़े राजनीतिक और मानवीय विवाद को जन्म दे दिया है।
यह मामला दिल्ली की साकेत कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट के आदेश के बाद, यूपी सिंचाई विभाग ने दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की मदद से इस जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की।
दिसंबर 2025 के अंत में इन घरों को सील कर दिया गया। वर्तमान में दिल्ली में GRAP-4 (प्रदूषण नियम) लागू होने के कारण बुलडोजर चलाने पर रोक है, इसलिए केवल सीलिंग की गई है।
मस्जिद कॉलोनी के निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी जताई है।लोगों का कहना है कि उनके पास दिल्ली के पते पर बने आधार कार्ड, वोटर आईडी और बिजली के बिल हैं। वे यहां 40-50 वर्षों से रह रहे हैं और कई पीढ़ियां यहीं पली-बढ़ी हैं।
निवासियों का आरोप है कि उन्हें सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कड़ाके की ठंड में लोगों का सामान बाहर फेंक दिया गया और उन्हें घरों से बाहर कर दिया गया।
सैकड़ों परिवार अब खुले आसमान के नीचे तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं। इनमें छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
इस मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि "जब वे दिल्ली में रहते हैं, दिल्ली सरकार को वोट देते हैं और दिल्ली की सुविधाओं का उपयोग करते हैं, तो अचानक उनकी जमीन यूपी सरकार की कैसे हो गई?" वे आतिशी से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कार्रवाई के लिए भाजपा और एलजी (LG) को जिम्मेदार ठहराया है। आप का तर्क है कि दिल्ली की जमीन पर यूपी सरकार का बुलडोजर एक्शन भाजपा की साजिश है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह कोर्ट के आदेश का पालन है और दिल्ली सरकार ने इन लोगों के पुनर्वास के लिए कुछ नहीं किया।
