कुलदीप सेंगर के समर्थन में जंतर-मंतर पर 'न्याय महापंचायत': क्षत्रिय संगठनों ने बांधा काला पट्टा, जांच को बताया 'साजिश'
नई दिल्ली। उन्नाव रेप मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर न्याय महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में विभिन्न क्षत्रिय संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग काला पट्टा बांधकर पहुंचे और सेंगर को निर्दोष बताते हुए उनके लिए न्याय की मांग की।
अवनीश सिंह ने दावा किया कि उन्होंने किसी को व्यक्तिगत रूप से बुलावा नहीं दिया था, केवल एक संदेश साझा किया गया था। अनुमति न मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग स्वतः ही जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए। उनका कहना था कि जब कोई व्यक्ति जनता के लिए काम करता है, तो उसके खिलाफ साजिशें रची जाती हैं। वे केवल न्याय की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनके अनुसार एक निर्दोष व्यक्ति जेल में बंद है।
यह महापंचायत ऐसे समय में हुई है, जब सीबीआई और पीड़िता ने हाईकोर्ट से कुलदीप सेंगर को मिली जमानत का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस पर अवनीश सिंह ने सीबीआई की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने पहले ही सेंगर को दोषी ठहरा दिया था और अब वह आखिरी दम तक उन्हें दोषी साबित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को उन्होंने स्वीकार किया था और उस समय कोई आंदोलन नहीं किया गया, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद सीबीआई और पीड़िता को भी उस फैसले को मान लेना चाहिए था।
अवनीश सिंह ने आरोप लगाया कि पीड़िता द्वारा दिल्ली की सड़कों पर किए गए प्रदर्शन और कथित प्रोपेगैंडा के कारण ही सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई। उन्होंने कहा कि वे खुद को पीड़ित मानते हैं और सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता ने कभी क्षत्रिय समाज से न्याय दिलाने की अपील की थी।
मामले को खत्म किए जाने की बात करते हुए अवनीश सिंह ने कहा कि वे पीड़िता को बहन-बेटी की तरह सम्मान देते हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इस विवाद को समाप्त किया जाए। उनके अनुसार दोनों परिवारों ने बहुत कुछ खोया है और दोनों पक्षों में जानें गई हैं। उन्होंने पीड़िता से आग्रह किया कि प्रतिशोध की भावना में आगे न बढ़ें और कथित प्रोपेगैंडा को बंद करें।
सोशल मीडिया पर पीड़िता की फोटो और पहचान उजागर करने की घटनाओं पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसी भी बहन-बेटी की पहचान उजागर करना पूरी तरह गलत है और उनकी महासभा या किसी संगठन ने ऐसा नहीं किया है। यदि किसी व्यक्ति ने व्यक्तिगत स्तर पर ऐसा किया है, तो वे उसका विरोध करते हैं।
पीड़िता के इस बयान पर कि यह महापंचायत सुप्रीम कोर्ट के जजों पर दबाव बनाने की कोशिश है, अवनीश सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि दबाव बनाना होता तो ट्रायल कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के समय ही सड़कों पर उतरा जाता। उनका कहना था कि उन्हें न्याय प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है और महापंचायत पूरी तरह शांतिपूर्ण रही, न कोई नारेबाजी हुई और न ही कोई आक्रामकता दिखाई गई।
आगे की रणनीति पर संकेत देते हुए अवनीश सिंह ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में जनता की अदालत बुलाई जाएगी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगली तारीख तय की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में लाखों लोग इसमें शामिल हो सकते हैं और यदि आंदोलन के जरिए न्याय मिलता है तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
गौरतलब है कि उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 में सामने आया था, जब पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। निचली अदालत ने सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि हाल ही में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। क्षत्रिय संगठनों का यह प्रदर्शन इस संवेदनशील मामले में एक नया मोड़ माना जा रहा है, जहां एक ओर पीड़िता न्याय की लड़ाई लड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सेंगर के समर्थक साजिश का दावा कर रहे हैं।
