गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में भारी हंगामा: कुलपति के खिलाफ छात्रों ने खोला मोर्चा, परिसर में रातों-रात लगे 'जवाब दो' के होर्डिंग्स
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अवैध नियुक्तियों के आरोपों से दहला GBU; छात्र संघर्ष समिति ने सीधे वीसी से मांगे सात तीखे जवाब
नोएडा: गौतमबुद्ध नगर के प्रतिष्ठित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब विश्वविद्यालय के मुख्य गेट और पूरे परिसर में कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के स्वर गूंजने लगे। छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जगह-जगह होर्डिंग्स लगा दिए हैं। इंटरनेट मीडिया पर इन होर्डिंग्स की तस्वीरें और वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिसने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साख पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का अंबार
छात्रों का सबसे गंभीर आरोप विश्वविद्यालय में हो रही वित्तीय अनियमितताओं को लेकर है। होर्डिंग्स के माध्यम से यह दावा किया गया है कि इंक्यूबेशन सेंटर, सेमिनार और कार्यशालाओं के नाम पर मिलने वाले सरकारी अनुदानों का बंदरबांट किया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि अकादमिक ढांचे को मजबूत करने के बजाय बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय की गरिमा गिर रही है।
नियुक्तियों में 'भाई-भतीजावाद' और अवैध पदोन्नति
विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक नियुक्तियों में पारदर्शिता के अभाव का मुद्दा उठाया है। आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर भाई-भतीजावाद के आधार पर अवैध नियुक्तियां और पदोन्नति की जा रही हैं। इससे न केवल संकाय सदस्यों का मनोबल गिरा है, बल्कि विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था भी चरमरा गई है।
बदहाल छात्रावास और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता
छात्रों ने छात्रावासों की दयनीय स्थिति पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया है। होर्डिंग्स में सीधे तौर पर उल्लेख किया गया है कि छात्रों को पेयजल, इंटरनेट और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। कैंपस में बढ़ते नशे के मामले और हाल के महीनों में हुई छात्र आत्महत्या की घटनाओं ने प्रशासन की संवेदनशीलता और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुलपति से सात सवालों पर मांगा जवाब
छात्र संघर्ष समिति ने कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह से सार्वजनिक रूप से इन सात प्रमुख बिंदुओं पर जवाब देने की मांग की है:
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वित्तीय अनुदानों का सही उपयोग क्यों नहीं हुआ?
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अवैध नियुक्तियों और भाई-भतीजावाद का आधार क्या है?
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परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और निष्पक्षता से खिलवाड़ क्यों?
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छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का जिम्मेदार कौन?
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फीस माफी प्रक्रिया में मनमानी क्यों की जा रही है?
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प्रशासनिक अधिकारियों का छात्रों के प्रति व्यवहार असंवेदनशील क्यों है?
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प्लेसमेंट और अकादमिक ढांचे को कमजोर करने की साजिश किसकी है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन आरोपों पर कुलपति स्पष्ट जवाब नहीं देते और राज्य सरकार द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि यह उनके भविष्य और विश्वविद्यालय की साख को बचाने की लड़ाई है।
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