नोएडा। नोएडा पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान में रविवार को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। थाना फेस-1 पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो भारत में प्रतिबंधित 1XBET ऑनलाइन बैटिंग ऐप के नाम पर कॉल सेंटर चलाकर देश भर के लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहा था। पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से 1 सर्वर, 4 कम्प्यूटर सीपीयू, 3 राउटर, 10 पीएनटी फोन, 1 की-बोर्ड अंग्रेजी /रसियन भाषा व 1 मोबाइल फोन बरामद किया है।
एडीसीपी नोएडा शैव्या गोयल ने बताया कि थाना फेस-1 नोएडा पुलिस द्वारा केन्द्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार से प्राप्त गोपनीय इंटेलीजेंस इनपुट के आधार पर कार्यवाही करते हुए MIR PEGASIS CONNECT PVT LTD कम्पनी के द्वितीय तल सेक्टर-1, नोएडा में 1XBET ऑनलाइन बैटिंग ऐप का अवैध काँल सेंटर संचालित कर भारत में प्रतिबन्धित बेटिंग ऐप के माध्यम से पैसे लगवाकर ठगी करने वाला साइबर अपराधी अनूप श्रेष्ठ पुत्र टंक बहादुर श्रेष्ठ को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि अभियुक्त के कब्जे से ऑनलाइन बैटिग ऐप के माध्यम से जुआ खिलाने के कार्य में प्रयुक्त 1 सर्वर, कम्प्यूटर, राउटर, पीएनटी फोन, अंग्रेजी/रसियन भाषा की-बोर्ड व एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। अभियुक्त व कम्पनी के मालिकों द्वारा अब तक करोड़ों रूपयो की ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों की जानकारी की जा रही है।
एडीसीपी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि 1XBET ऑनलाइन बेटिंग के सम्बन्ध में जम्मू कश्मीर के श्रीनगर साइबर थाने में अभियोग पंजीकृत हुआ था। जिसकी जानकारी i4C के माध्यम से नोएडा पुलिस को दी गई थी। i4C के टेक्नो लीगल की सहायता से अभियुक्तों के ऑफिस को ट्रेस करते हुए थाना फेस-1 पुलिस द्वारा अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है ।
उन्होंने बताया कि अभियुक्त द्वारा सेक्टर-1 नोएडा में 1XBET ऑनलाइन बैटिंग ऐप का एक अवैध कॉल सेंटर संचालित कर भारत में प्रतिबन्धित ऑनलाइन बेटिंग ऐप के माध्यम से जुआं खिलाने के लिए भारतीय नागरिकों को प्रेरित करके और उनके पैसे लगवाकर ठगी का शिकार बनाया जा रहा था।
नोएडा पुलिस के अनुसार साइबर ठग अनूप श्रेष्ठ की कहानी किसी फिल्म जैसी है। वह 2022 में मास्को (रूस) गया था, जहाँ उसने 1XBET कंपनी के मुख्यालय में ढाई साल तक काम किया। वहां से 'लीजा' नाम की एक रसियन अधिकारी ने उसे भारत में नेटवर्क फैलाने के लिए भेजा। जून 2025 में भारत लौटने के बाद वह दिल्ली-नोएडा से इस काले कारोबार को संचालित कर रहा था। जांच में पता चला है कि यह गिरोह भारत में प्रतिबंधित बैटिंग ऐप के जरिए लोगों को जुआ खेलने के लिए उकसाता था।