मुंबई: मंत्रालय के भीतर रिश्वत लेते कर्मचारी रंगे हाथ गिरफ्तार, दफ्तर सील
मुंबई । महाराष्ट्र के राज्य सचिवालय 'मंत्रालय' के भीतर शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक नाटकीय कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्यालय खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल के अधिकार क्षेत्र में आता है। अधिकारियों ने संबंधित कार्यालय को सील कर दिया है। यह मामला लातूर के एक मेडिकल स्टोर मालिक से जुड़ा है, जिसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। नियमों के अनुसार, रद्द किए गए लाइसेंस को बहाल करने का अधिकार उचित सुनवाई और समीक्षा के बाद संबंधित मंत्री के पास होता है।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, मंत्री जिरवाल के कार्यालय में कार्यरत क्लर्क राजेंद्र धीरंग ने मेडिकल लाइसेंस का निलंबन रद्द करने के एवज में शिकायतकर्ता से 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। दुकानदार ने इस मांग के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर, एसीबी ने मंत्रालय के भीतर ही जाल बिछाया और धीरंग को 35,000 रुपये की बातचीत की गई रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इस मामले में कार्यालय के एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया कि उसने यह रिश्वत मंत्री के निजी सचिव रामदास गाडे के निर्देश पर स्वीकार की थी।
ज़िरवाल ने इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि अगर रिश्वत लेने के कथित मामले में उनकी निजी संलिप्तता साबित होती है, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने एक मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निलंबित करने के सिलसिले में कथित रिश्वत से जुड़ी घटना को "बहुत गलत" बताया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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