बंगाल में बीएलओ ने अपनी पत्नी सहित खुद को जारी किया एसआईआर नोटिस..मतदाता सूची संशोधन में अजीबोगरीब स्थिति
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के नियमों के सख्त पालन की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। पूर्व बर्दवान जिले के कटवा विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 165 के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) देवशंकर चटर्जी ने मतदाता सूची में पाई गई “तार्किक विसंगतियों” के कारण खुद और अपनी पत्नी को एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) सुनवाई का नोटिस जारी किया है।
देवशंकर चटर्जी ने बताया कि हाल ही में मतदाता जानकारी के सत्यापन के दौरान उनके और उनकी पत्नी अनिंदिता चटर्जी के दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां सामने आईं। चुनाव आयोग की ओर से उनके पिता के उपनाम की वर्तनी में त्रुटि पाई गई, वहीं उनकी पत्नी और उनके पिता की उम्र से संबंधित जानकारी में भी अंतर पाया गया।
चुनाव आयोग के ऐप के माध्यम से नोटिस मिलने के बाद देवशंकर ने बीएलओ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बिना किसी रियायत के प्रक्रिया पूरी की। उन्होंने कहा, “मैं भले ही बीएलओ हूं, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों का पालन करना मेरी जिम्मेदारी है। मेरे परिवार को कोई विशेष छूट नहीं मिल सकती। कानून की नजर में सभी बराबर हैं।”
इस फैसले को उनकी पत्नी अनिंदिता चटर्जी ने भी स्वीकार किया है। अब अन्य नागरिकों की तरह दंपत्ति को भी सुनवाई में शामिल होने के लिए कतार में लगकर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह घटना कटवा शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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